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महाकाल मंदिर: ब्रह्मा ने बनवाया, इल्तुमिश ने तोड़ा और लूटा, फिर इस मराठा ने लौटाया गौरव

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  • Updated Oct 11, 2022, 07:16 PM IST

Mahakal Corridor: महाकाल का प्राचीनतम उल्लेख पुराणों में मिलता है। जिसे ब्रह्मा जी ने बनवाया था। इसके अलावा एक कहानी के अनुसार 600 ईसा पूर्व में राजा चंदा प्रद्योत ने राजकुमार कुमारसेन की महाकाल मंदिर की कानून-व्यवस्था की देखभाल के लिए नियुक्ति का भी उल्लेख है। इसके अलावा चौथी और तीसरी ईसा पूर्व उज्जैन की मुद्राओं में भी भगवान शिव की आकृति अंकित पाई गई है।

KEY HIGHLIGHTS
  • महाकवि कालीदास के उपन्यास मेघदूतम में भी महाकाल मंदिर का उल्लेख मिलता है।
  • महाकाल मंदिर को दिल्ली के शासक इल्तुमिश के दौर में लूटा गया और उसे तोड़ा गया।
  • उज्जैन की लोकेशन खगोल शास्त्र में भी उसे महत्व स्थान दिलाती है।

Mahakal Corridor: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने उज्जैन स्थित महाकाल कॉरिडोर का उद्घाटन कर दिया है। महाकाल की नगरी उज्जैन पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। और इसका इतिहास भी पुराणों में मिलता है। मान्यता है कि महाकाल मंदिर का निर्माण ब्रह्मा जी ने कराया था। और उसके बाद से उसका उल्लेख विभिन्न किताबों में मिलता है। कालीदास (Kalidas) के मेघदूतम में भी पत्थर और लकड़ी से बने मंदिर का वर्णन है। ईसा पूर्व से बने महाकाल मंदिर का हमेशा से महत्व रहा है। लेकिन इसी वजह से महाकाल मंदिर आंक्राताओं के भी निशाने पर आया। और इसे तोड़ा और लूटा गया।

पुराणों में जिक्र

महाकालेश्वर मंदिर की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, महाकाल का प्राचीनतम उल्लेख पुराणों में मिलता है। जिसे ब्रह्मा जी ने बनवाया था। इसके अलावा एक कहानी के अनुसार 600 ईसा पूर्व में राजा चंदा प्रद्योत ने राजकुमार कुमारसेन की महाकाल मंदिर की कानून-व्यवस्था की देखभाल के लिए नियुक्ति का भी उल्लेख है। इसके अलावा चौथी और तीसरी ईसा पूर्व उज्जैन की मुद्राओं में भी भगवान शिव की आकृति अंकित पाई गई है।

वहीं महाकवि कालीदास के उपन्यास मेघदूतम में भी मंदिर का उल्लेख मिलता है। इसके अनुसार भव्य मंदिर की नींव और चबूतरा पत्थरों से बनाया गया था और मंदिर लकड़ी के खंभों पर टिका था। हालांकि गुप्त काल से पहले मंदिर पर कोई शिखर नहीं था, छतें लगभग प्लेन थीं। इसके बाद 7वीं शताब्दी में बाण भट्‌ट के कादंबिनी में महाकाल मंदिर का वर्णन मिलता है। 11 वीं शताब्दी में राजा भोज ने महाकाल मंदिर के शिखर को ऊंचा करवाया था।

इल्तुमिश ने तोड़ा और लूटा

12 वीं शताब्दी में जब दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई। उसके बाद से उज्जैन का प्राचीन गौरव कम होता गया। मध्य प्रदेश सरकार की उज्जैन पर आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार महाकाल मंदिर को दिल्ली के शासक इल्तुमिश के दौर में लूटा गया और उसे तोड़ दिया गया था। और इस बात का उल्लेख इल्तुमिश के समय के इतिहासकार मिनहाजुद्दीन सिराज द्वारा फारसी भाषा में लिखी गई किताब तबकात-ए-नासिरी में भी मिलता है। इल्तुमिश ने 1234 ईसवी में महाकाल मंदिर पर हमला किया था।

मराठाओं ने फिर वापस दिलाया गौरव

इसके बाद जब 17 वीं शताब्दी में मालवा पर मराठाओं का आधिपत्य स्थापित हुआ, तो इसके बाद से उज्जैन का खोया हुआ गौरव धीरे-धीरे वापस लौटने लगा। महाकाल मंदिर का पुनर्निर्माण ग्वालियर के सिंधिया राजवंश के संस्थापक महाराजा राणोजी सिंधिया ने कराया था। बाद में उन्हीं की प्रेरणा पर यहां सिंहस्थ समागम की भी दोबारा शुरुआत हुई।

बेहद खास है लोकेशन

उज्जैन की लोकेशन खगोल शास्त्र में भी उसे महत्व स्थान दिलाती है। उज्जैन के नजदीक से कर्क रेखा गुजरती है। और प्राचीन समय में जो देशांतर उज्जैन से गुजरता है, उसका आज के दौर के ग्रीनविच जैसा महत्व था। इसीलिए पुराने समय में उज्जैन के देशांतर के साथ टाइम का निर्धारण किया जाता था। इसीलिए उज्जैन प्राचीन समय से कालगणना का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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