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कभी बोले थे 'हिंदू-मुस्लिम भाई-भाई', आज हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरों में गिने जाते हैं हिमंता…कैसे बदली राजनीति?

Congress to BJP Himanta: 2002 गुजरात दंगों के बाद हिमंता ने एक बयान में कहा था कि 'गुजरात में पानी के पाइपों से मुसलमानों का खून बहता है।' यह बयान उस समय काफी चर्चित हुआ था।

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कभी बोले थे 'हिंदू-मुस्लिम भाई-भाई', आज हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरों में गिने जाते हैं हिमंता…कैसे बदली राजनीति?

Himanta Biswa Sarma politics: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा आज बीजेपी और हिंदुत्व राजनीति के सबसे आक्रामक चेहरों में गिने जाते हैं। लेकिन उनकी राजनीति हमेशा ऐसी नहीं थी। एक दौर था जब हिमंता कांग्रेस में रहते हुए 'हिंदू-मुस्लिम भाई-भाई' की राजनीति की बात करते थे और नरेंद्र मोदी के कट्टर आलोचकों में शामिल माने जाते थे।

2002 गुजरात दंगों के बाद हिमंता ने एक बयान में कहा था कि 'गुजरात में पानी के पाइपों से मुसलमानों का खून बहता है।' यह बयान उस समय काफी चर्चित हुआ था और कांग्रेस की लाइन के मुताबिक माना गया था। उस दौर में हिमंता खुद को सेक्युलर राजनीति के चेहरे के तौर पर पेश करते थे।

राजनीतिक शैली पूरी तरह बदली

लेकिन 2015 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आने के बाद उनकी राजनीतिक शैली पूरी तरह बदलती नजर आई। बीजेपी में आने के बाद हिमंता ने खुद को पूर्वोत्तर में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की राजनीति के मजबूत चेहरे के रूप में स्थापित किया। NRC, CAA, मदरसा नीति, जनसंख्या नियंत्रण और मुस्लिम आरक्षण जैसे मुद्दों पर उनके बयान लगातार चर्चा में रहे।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि हिमंता ने असम की बदलती सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों को बहुत तेजी से समझा। कांग्रेस में रहते हुए जहां उनका फोकस जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों पर था, वहीं बीजेपी में आने के बाद उन्होंने हिंदुत्व और मजबूत प्रशासन वाली छवि बनाई।

विश्लेषकों के मुताबिक, हिमंता का बदलाव सिर्फ विचारधारा का नहीं बल्कि राजनीतिक सर्वाइवल और अवसर की समझ का भी हिस्सा था। कांग्रेस में नेतृत्व संघर्ष और तरुण गोगोई के साथ मतभेद के बाद उन्होंने बीजेपी का रास्ता चुना और वहीं से उनका राष्ट्रीय कद तेजी से बढ़ा।

आज स्थिति यह है कि जो नेता कभी मोदी के खिलाफ बयान देते थे, वही अब बीजेपी के सबसे मुखर नेताओं में शामिल हैं। असम से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक हिमंता की पहचान अब एक 'हार्डलाइन हिंदुत्व' नेता की बन चुकी है।

12 मई को नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा लेंगे सीएम पद की शपथ

असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा को राज्य में अगली सरकार बनाने का रविवार को निमंत्रण दिया। आम राय से भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद शर्मा ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के नेताओं के साथ लोक भवन में आचार्य से मुलाकात की और सरकार के गठन का दावा पेश किया। आचार्य 12 मई को शर्मा को मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के सदस्यों को पद व गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।

शपथ ग्रहण समारोह खानापाड़ा में स्थित वेटेरिनरी कॉलेज प्लेग्राउंड में आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हो सकते हैं। भाजपा, असम गण परिषद (एजीपी) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ)[NDA] ने हाल ही में हुए 126 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में 102 सीट जीतकर बहुत हासिल किया। भाजपा ने 82 सीट जीतीं, जबकि एजीपी और बीपीएफ ने 10-10 सीट पर जीत हासिल की। पहली बार 2021 में मुख्यमंत्री बने शर्मा लगातार दूसरी बार इस पद पर आसीन होने वाले राज्य के पहले गैर-कांग्रेसी नेता होंगे।

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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