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हिमाचल में भाजपा के इन तीन दिग्गजों की राजनीतिक साख दांव पर,तोड़ पाएंगे 37 साल पुराना रिकॉर्ड

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  • Updated Oct 31, 2022, 07:39 PM IST

Himachal Pradesh Assembly Election: हिमाचल प्रदेश के वोटरों की यह खासियत रही है कि वह लगातार किसी सरकार को मौका नहीं देते हैं। इसलिए 1985 के बाद से कोई भी सरकार वापसी नहीं कर पाई है। अगर भाजपा सत्ता में वापसी करती है तो 37 साल का रिकॉर्ड टूटेगा। लेकिन बागी पार्टी के लिए चुनौती बन रहे हैं।

KEY HIGHLIGHTS
  • इस बार भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को टिकट नहीं दिया है।
  • हिमाचल प्रदेश जे.पी.नड्डा का गृह राज्य है।
  • मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सिराज से चुनाव लड़ रहे हैं।

Himachal Pradesh Assembly Election: हिमाचल प्रदेश में चुनावी बिगुल बज चुका है। और राज्य की 68 विधानसभा सीटों पर 12 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। इन चुनावों पर जहां भाजपा के सामने सत्ता बचाए रखने की चुनौती है। वहीं कांग्रेस के सामने सत्ता में दोबारा वापसी की चुनौती है। अभी तक के इतिहास को देखा जाय तो हिमाचल में पिछले 37 साल में कोई भी सरकार, सत्ता में वापसी नहीं कर पाई है। इसीलिए भाजपा इस बार इस बार 'सरकार नहीं, रिवाज बदले' के नारे के साथ मैदान में उतरी है। भाजपा का यह नारा कितना कारगर होगा यह तो 8 दिसंबर को पता चलेगा। लेकिन सत्ता में वापसी के लिए हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की साख तो दांव पर है, इसके अलावा दो और नेता हैं, जिनकी साख भी जयराम ठाकुर से कम दांव पर नहीं लगी है। क्योंकि अगर भाजपा सत्ता में वापसी नहीं कर पाती है, तो उनके लिए केंद्र के स्तर पर नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

भाजपा के इन 3 दिग्गजों की साख दांव पर

सबसे पहले बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की, जिन्हें 2017 में हिमाचल में भाजपा के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल की जगह मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली थी। जयराम ठाकुर इस बार सिराज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। और चुनाव उनके चेहरे पर लड़ा जा रहा है। ऐसे में अगर वह पार्टी को नहीं जिता पाते हैं, तो उनके नेतृत्व क्षमता पर न केवल सवाल उठेंगे। बल्कि प्रेम कुमार धूमल के बेटे और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर उनके लिए राज्य में चुनौती बन सकते हैं।

इस बार भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को टिकट नहीं दिया है। 2017 में भाजपा की जीत के बावजूद मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल सुजानपुर से चुनाव हार गए थे। और इसलिए उनके हाथ से मुख्यमंत्री की कुर्सी फिसल गई थी। और उनकी साख को झटका लगा था। ऐसे में भले ही वह इस बार चुनावी मैदान में नहीं है। लेकिन केंद्रीय मंत्री और उनके बेटे अनुराग ठाकुर के लिए राज्य का चुनाव बेहद अहम है। और शायद इसीलिए उन्होंने पहली रैली सुजानपुर से की थी । यहीं नहीं विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार के दौरान केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भावुक भी हो गए। ऐसे में अगर भाजपा जीतती है तो उसका फायदा अनुराग ठाकुर को भी मिलेगा। ऐसा कहा जा रहा है कि इस बार धूमल ने चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था।

इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे.पी.नड्डा के लिए भी यह चुनाव बेहद अहम है। असल में अध्यक्ष होने के साथ-साथ, हिमाचल प्रदेश जे.पी.नड्डा का गृह राज्य है। ऐसे में अगर भाजपा यहां चुनाव हारती है, तो निश्चित तौर पर जे.पी.नड्डा के लिए सेटबैक होगा।

1985 से सत्ता में वापसी नहीं कर पाई है कोई सरकार

हिमाचल प्रदेश के वोटरों की यह खासियत रही है कि वह लगातार किसी सरकार को मौका नहीं देते हैं। इसलिए 1985 के बाद से कोई भी सरकार वापसी नहीं कर पाई है। ऐसे में भाजपा के इन तीन दिग्गजों के लिए बड़ी चुनौती है। खास तौर पर जब अक्टूबर 2021 में हुए उप चुनाव में कांग्रेस ने मंडी लोक सभा सीट जीतने के साथ तीनों विधानसभा सीट जीतकर भाजपा का सफाया किया। लेकिन हाल में कांग्रेस में जारी कलह भाजपा के लिए सत्ता में वापसी का मौका बन सकता है। और अगर ऐसा होता है तो 37 साल का रिकॉर्ड टूटेगा। हालांकि भाजपा के सामने भी बागियों की चुनौती है। और उनसे निपटने के लिए जे.पी.नड्डा ने खुद मोर्चा संभाल रखा है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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