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लंबे समय तक साथ पत्नी की तरह रहने वाली दूसरी महिला भी पेंशन की हकदार, हिमाचल हाई कोर्ट का फैसला

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि एक महिला, जो दो दशकों से अधिक समय से एक दिवंगत कर्मचारी के साथ रहती थी, वैध विवाह नहीं होने के बावजूद पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं की जा सकती।

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पत्नी की तरह रह रही महिला को भी पेंशन का हक- हिमाचल HC का फैसला (AI image)

Himachal High Court: हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा है कि लंबे समय तक साथ रहने वाली दूसरी पत्नी भी पारिवारिक पेंशन की हकदार है। हाई कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर कोई पुरुष और महिला लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह साथ रहते हैं, तो भले ही उनका विवाह कानूनी रूप से अवैध हो, लेकिन वह अनैतिक नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में आर्थिक रूप से कमजोर महिला को बेसहारा नहीं छोड़ा जा सकता और वह अपने दिवंगत पति की पारिवारिक पेंशन पाने की हकदार है।

क्या है मामला?

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि एक महिला, जो दो दशकों से अधिक समय से एक दिवंगत कर्मचारी के साथ रहती थी, वैध विवाह नहीं होने के बावजूद पारिवारिक पेंशन से वंचित नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि ऐसा संबंध अवैध हो सकता है, लेकिन अनैतिक नहीं। मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी ने कहा कि कर्मचारी राज्य विद्युत बोर्ड में कार्यरत थी और पारिवारिक पेंशन प्रदान करने का उद्देश्य भरण-पोषण प्रदान करने के उद्देश्य से अलग नहीं हो सकता।

अदालत ने आदेश दिया कि अपीलकर्ता को पति की मौत के बाद से बकाया सहित पारिवारिक पेंशन दी जाए। अदालत ने माना कि हाशिये पर रहने वाली महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र और आत्मसम्मान के साथ जीने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि जब कोई महिला लंबे समय तक किसी पुरुष के साथ रहती है और आर्थिक रूप से उस पर निर्भर होती है, तो उसे केवल तकनीकी आधार पर पेंशन से वंचित करना उसे भुखमरी की ओर धकेलने जैसा होगा। अदालत ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5(i) के तहत दूसरा विवाह भले ही अवैध हो, लेकिन इसे समाज की नजरों में अनैतिक नहीं कहा जा सकता। जिस तरह ऐसी शादियों में रखरखाव (मेंटेनेंस) का अधिकार होता है, उसी तरह पेंशन का उद्देश्य भी समान है।

अदालत ने पाया कि अपीलकर्ता और रिटायर्ड फोरमैन 1994 से लेकर 2006 तक पति-पत्नी की तरह साथ रहे थे। पति ने जीवित रहते हुए अपीलकर्ता का नाम अपने सर्विस रिकॉर्ड में नामांकित किया था, जिसे बाद में विवादों के कारण हटाने की कोशिश की गई थी। इसके साथ ही कर्मचारी की पहली पत्नी की मृत्यु हो चुकी है। उसके बच्चों ने भी पेंशन पर कोई दावा नहीं किया।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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