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निमिषा प्रिया पर SC में सुनवाई, संस्था के वकील जाना चाहते हैं यमन, कोर्ट ने कहा- सरकार के पास जाइए

सरकार की ओर से पेश अटॉनी जनरल ने कहा कि हम नहीं चाहते कि कुछ ऐसा हो जिसका गलत नतीजा निकले। हम चाहते है कि यह महिला सकुशल वापस आ जाए। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ता संगठन को इस मुद्दे पर भारत सरकार को एक प्रतिनिधित्व सौंपने की छूट दी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 अगस्त की तारीख तय की है।

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सुप्रीम कोर्ट ने संस्था को सरकार के पास जाने के लिए कहा। तस्वीर-ANI

Photo : ANI

Nimisha Priya Case: यमन की जेल में बंद भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को फांसी से बचाने के लिए दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को सुनवाई हुई। इस मामले में याचिकाकर्ता 'सेव निमिषा प्रिया एक्शन काउंसिल' नाम की संस्था ने कोर्ट से यमन जाने की इजाजत मांगी। इस पर कोर्ट ने संस्था को सरकार के पास जाने के लिए कहा। संस्था की ओर से पेश वकील ने कहा कि वे मृतक के घरवालों से बातचीत करने के लिए यमन जाना चाहते हैं। वकील ने कोर्ट को बताया कि फांसी की सजा रुक गई है। हम सरकार के आभारी है। पर हमें यमन जाने की जरूरत है ताकि हम मृतक के घरवालों से बात कर सके।

हम नहीं चाहते कोई गलत नतीजा निकले-अटार्नी जनरल

वहीं, सरकार की ओर से पेश अटॉनी जनरल ने कहा कि हम नहीं चाहते कि कुछ ऐसा हो जिसका गलत नतीजा निकले। हम चाहते है कि यह महिला सकुशल वापस आ जाए। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने याचिकाकर्ता संगठन को इस मुद्दे पर भारत सरकार को एक प्रतिनिधित्व सौंपने की छूट दी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 अगस्त की तारीख तय की है।

निमिषा प्रिया की फांसी पर रोक लग गई है

कोर्ट सूचित किया गया कि यमन में हत्या के जुर्म में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी पर रोक लग गई है। केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ को बताया कि इस मामले में ‘प्रयास जारी हैं।’ उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि प्रिया सुरक्षित वापस आ जाएं। पीठ ने कहा, ‘सरकार हर संभव मदद कर रही है।’

अब ‘ब्लड मनी’ का मुद्दा आएगा

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि पहले उन्हें (नर्स को) क्षमादान मिले, उसके बाद ‘ब्लड मनी’ का मुद्दा आएगा। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि फांसी स्थगित कर दी गई है। शीर्ष अदालत यमन में फांसी की सजा का सामना कर रही प्रिया (38) को बचाने के लिए राजनयिक माध्यमों का इस्तेमाल करने के वास्ते केंद्र को निर्देश देने संबंधी एक याचिका पर सुनवाई कर रही है। प्रिया को पहले फांसी 16 जुलाई को दी जानी थी। केरल के पलक्कड़ जिले की नर्स प्रिया को 2017 में अपने यमनी व्यापारिक साझेदार की हत्या का दोषी ठहराया गया था। उसे 2020 में मौत की सजा सुनाई गई थी और उसकी अंतिम अपील 2023 में खारिज कर दी गई थी। वह वर्तमान में यमन की राजधानी सना की एक जेल में बंद है।

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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