Goa illegal Land Acquisition Case: गोवा के फतोर्दा विधायक विजय सरदेसाई ने गोवा में भूमि हड़पने के मुद्दे पर अपने वादों को पूरा करने में विफल रहने के लिए मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की आलोचना की है। सरदेसाई ने कहा, जांच के लिए नियुक्त एक सदस्यीय आयोग आया, कमीशन लिया और चला गया। उन्होंने आयोग के सीमित अधिकार क्षेत्र को रेखांकित करते हुए कहा कि विभाग के भीतर कमियों की पहचान करना ही आयोग का काम है, जबकि उसके पास कार्रवाई करने का कोई वास्तविक अधिकार है ही नहीं। सरदेसाई ने कानूनी कार्रवाइयों में धीमी प्रगति की भी आलोचना की और बताया कि भूमि हड़पने के 93 मामलों में से केवल 22 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं।
अगस्त 2020 में, एक कार्यक्रम में सीएम सावंत ने गोवा के लोगों को आश्वासन दिया था कि भूमि हड़पने वालों द्वारा हड़पी गई और बेची गई जमीन को एसआईटी द्वारा उसके असली मालिकों को वापस कर दिया जाएगा। विपक्ष का आरोप है कि करीब चार साल बाद भी यह वादा काफी हद तक अधूरा है, जिसकी वजह से विपक्षी नेताओं ने कड़ी आलोचना की है।
न्यायमूर्ति वीके जाधव (रिटायर्ड) की अगुआई में एक सदस्यीय आयोग को जून 2022 में गोवा में धोखाधड़ी वाले भूमि सौदों के आरोपों की जांच के लिए नियुक्त किया गया था। आयोग का काम अभिलेखीय दस्तावेजों की जालसाजी से जुड़े धोखाधड़ी वाले भूमि सौदों की जांच करना था। इसके गठन और 1 नवंबर, 2023 को सीएम सावंत को रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद, इस मामले में कोई खास कार्रवाई नहीं हुई। विधायक नीलेश कैबरल ने भी सरदेसाई के सुर में सुर मिलाया और सवाल उठाया कि अगर एसआईटी होने के बाद भी अदालत जाने की जरूरत है, तो एसआईटी का क्या उपयोग है? विपक्ष के इन आरोपों पर मुख्यमंत्री सावंत किस तरह पलटवार करते हैं इसपर निगाहें टिकीं हैं। जाहिर है अवैध भूमि अधिग्रहण के मामलों में आने वाले दिनों में राजनीति और गरमा सकती है।
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