G-20 Summit: जी-20 सम्मेलन में शनिवार (नौ सितंबर, 2023) को भारत के हाथ महत्वपूर्ण कामयाबी आई। सदस्य देशों के बीच सहमति के साथ जी20 ने ‘नई दिल्ली लीडर्स समिट डिक्लेरेशन' (मैनिफेस्टो/घोषणापत्र) को अपना लिया। यह ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किया गया।
भारतीय पीएम ने शिखर सम्मेलन में नेताओं से कहा, ‘‘मित्रों, हमें अभी-अभी अच्छी खबर मिली है कि हमारी टीम की कड़ी मेहनत और आपके सहयोग के कारण, नयी दिल्ली जी20 लीडर्स समिट डिक्लेरेशन पर आम सहमति बन गई है। मैं घोषणा करता हूं कि इस घोषणापत्र को स्वीकार कर लिया गया है।’’
37 पेज के घोषणापत्र में चार बार यूक्रेन का जिक्र हुआ, मगर सीधे तौर पर रूस का नाम नहीं लिया गया। मैनिफेस्टो में "यूक्रेन में युद्ध" कहा गया है। चूंकि, रूस भारत का लंबे समय से अच्छा दोस्त माना जाता है, लिहाजा उसके नाम के उल्लेख से बचा गया। वहीं, नौ बार इसमें आतंकवाद का नाम आया।

g-20 declaration
इस बीच, भारत के जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने बताया कि जी20 नेताओं की ओर से अपनाया गया ‘नई दिल्ली घोषणापत्र ’ मजबूत और सतत विकास, सतत विकास लक्ष्यों पर प्रगति में तेजी लाने, हरित विकास समझौते और बहुपक्षवाद में नये सिरे जान फूंकने पर केंद्रित है।
यूक्रेन संघर्ष पर बढ़ते तनाव और अलग-अलग विचारों के बीच भारत की जी20 अध्यक्षता में यह एक महत्वपूर्ण कामयाबी है। घोषणापत्र पर सर्वसम्मति और उसके बाद इसे अपनाने की घोषणा भारत की ओर से यूक्रेन संघर्ष का जिक्र करने के लिए जी20 देशों को एक नया पाठ बांटने के कुछ घंटों बाद आई।
इन बिंदुओं के जरिए समझें इस घोषणापत्र के मायने
- मजबूत, टिकाऊ, संतुलित और समावेशी विकास
- एसडीजी पर प्रगति में तेजी लाना
- सतत भविष्य के लिए हरित विकास समझौता
- 21वीं सदी के लिए बहुपक्षीय संस्थान
- तकनीकी परिवर्तन और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा
- इंटरनेशनल टैक्सेशन
- लैंगिक समानता और सभी महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाना
- वित्तीय क्षेत्र के मुद्दे
- आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग का मुकाबला करना
- अधिक समावेशी विश्व का निर्माण
रूस और चीन दोनों बाली घोषणापत्र में यूक्रेन संघर्ष को लेकर दो पैराग्राफ पर सहमत हुए थे, लेकिन इस साल वे इससे पीछे हट गए जिससे भारत के लिए मुश्किलें पैदा हो गईं। वित्त और विदेश मंत्रियों सहित भारत की जी20 अध्यक्षता के तहत आयोजित लगभग सभी प्रमुख बैठकों में यूक्रेन संघर्ष से संबंधित किसी भी पाठ पर रूस और चीन के विरोध के कारण आम सहमति वाले दस्तावेज जारी नहीं किए जा सके।
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