Sea Plane Test: भारत में सोमवार को पहली बार किसी गैर-परिचालन एयरलाइन के टर्बोप्रॉप विमान को फ्लोट लगाकर सी-प्लेन (sea plane) में बदला गया और परीक्षण उड़ान भरी गई। डी हैविलैंड कनाडा डीएचसी-6 ट्विन ओटर विमान (De Havilland Canada DHC-6 Twin Otter) ने उत्तराखंड में हरिद्वार स्थित गंगा बैराज से आने-जाने की परीक्षण (रखरखाव) उड़ान भरी। मंजूरी मिलने के बाद अवनी सिंह के नेतृत्व वाली स्काईहॉप एविएशन के स्वामित्व वाला यह विमान, डीजीसीए से लाइसेंस प्राप्त होने के बाद अंडमान और निकोबार में परिचालन करेगा।
फ्लोट लगाकर सीप्लेन में बदला गया
यह विमान पूर्व फ्लाई बिग एयरलाइन का था, जिसने कुछ समय पहले उड़ानें बंद कर दी थीं। इस बजट में सीप्लेन सेवा को बढ़ावा देने के बाद, केंद्रीय नागरिक उड्डयन सचिव समीर सिन्हा ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को इस विमान को फ्लोट लगाकर सीप्लेन में बदलने का प्रमाण पत्र देने को कहा। फिर भारत में फ्लोट लगाकर विमान में संशोधन किए जाने के बाद, डीजीसीए ने विमान को उड़ान योग्यता का प्रमाण पत्र जारी किया और इसकी परिचालन प्रक्रिया को मंजूरी दे दी।
सोमवार को उत्तराखंड में इस विमान की पहली परीक्षण उड़ान भरी गई - योजना के अनुसार टिहरी बांध से नहीं, बल्कि गंगा बैराज से इसने उड़ान भरी। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो यह जल्द ही अंडमान में उड़ान भरने लगेगा। सरकार भारत में सीप्लेन सेवाओं को बड़े पैमाने पर शुरू करने के लिए उत्सुक है।
गंगा बैराज पर दिखा ऐतिहासिक क्षण
सोमवार को गंगा बैराज पर एक ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला जब एक निजी कंपनी ने सीप्लेन की सफल ट्रायल लैंडिंग की। इस पहल को राज्य में हवाई संपर्क और पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार आधुनिक परिवहन अवसंरचना को लगातार बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री के दूरदर्शी दृष्टिकोण और प्रयासों का ही परिणाम है कि ऋषिकेश जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल में सीप्लेन सेवाओं की संभावना अब साकार हो रही है। सरकार की योजना भविष्य में इस सेवा को टिहरी झील, नैनीताल झील और अन्य जल निकायों तक विस्तारित करने की है, जिससे उत्तराखंड देश में अग्रणी सीप्लेन गंतव्य के रूप में स्थापित हो जाएगा।
