EVM Controversy: ईवीएम पर उठने वाले सवालों पर चुनाव आयोग के रुख को लेकर गुरुवार को एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार के घर विपक्षी दलों की बैठक हुई। बैठक के बाद वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि दुनिया में ऐसी कोई मशीन नहीं जिससे छेड़छाड़ नहीं की का सकती है, ऐसे में चुनाव आयोग को विपक्ष और जनता के सवालों के जवाब देना चाहिए।
समान विचारधारा वाली दलों की बैठक
ईवीएम को लेकर एक बार फिर से विपक्षी दलों ने मोर्चा खोल दिया है। इस सिलसिले में रणनीति बनाने के लिए गुरुवार शाम एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने कमान संभाली और समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक दिल्ली के अपने आवास पर बुलाई। जिसमें ईवीएम को लेकर विस्तार से चर्चा हुआ और इसके खिलाफ लड़ाई लड़ने की आगे की रणनीति पर भी बात हुई।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में तीन अहम बातों पर चर्चा हुई
- सुप्रीम कोर्ट में ईवीएम मामले को किस रूप में ले जाना है?
- चुनाव आयोग से ईवीएम से वोट डालने के प्रक्रिया में क्या बदलाव की मांग करनी है?
- जनता के बीच इस मुद्दे को लेकर कैसे जाना है, कैसे अपने पक्ष में माहौल बनाना है?
सूत्रों के मुताबिक विपक्षी नेताओं का मानना है कि ईवीएम मशीन में जो चिप होती है, जिसके साथ गड़बड़ी किये जाने की आशंका होती है। इसलिए सबसे पहले इस चिंता को चुनाव आयोग को दूर करना चाहिए। इस मसले पर कपिल सिब्बल ने संशय जाहिर करते हुए पूछा कि आखिर जब भी ईवीएम में गड़बड़ी होती है तो वोट बीजेपी को ही क्यों जाता है?
ईवीएम स्टैंड एलोन डिवाइस नहीं: दिग्विजय सिंह
मीटिंग के बाद कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि ये चुनाव आयोग ने भी माना है कि ईवीएम एक स्टैंड एलोन डिवाइस नहीं है, क्योंकि जब इसमें प्रत्याशियों के नाम और चुनाव चिन्ह डाले जाते हैं तो इसे इंटरनेट से कनेक्ट किया जाता है।
हर वोट के लिए वीवीपैट से पर्ची निकले
आज बैठक में विपक्षी दलों ने व्यक्तिगत चर्चा के बाद दो बातों पर सहमति बनाई है।
- ईवीएम से दिए जाने वाले हर वोट की वीवीपैट से पर्ची निकले। इसके बाद हर सीट पर 30 से 40 फीसदी रैंडम पर्चियों का मिलान किया जाए और अगर मिलान में गड़बड़ी हो तो सारी पर्चियों की गिनती की जाए।
- अभी तक फॉर्म 17 सी के तहत जो भी वोट ईवीएम में पड़ते हैं, उसकी संख्या पीठासीन अधिकारी मुहर और दस्तखत करके हर उम्मीदवारों के एजेंट को दे देते हैं। लेकिन विपक्षी पार्टियों ने तय किया है कि इसके साथ ही अब फॉर्म 17ए के तहत उम्मीदवारों के एजेंट पीठासीन अधिकारी से वोट डालने आए मतदाताओं की संख्या भी दस्तखत और मुहर लगवाकर लें। ऐसे में अगर ईवीएम की चिप में अगर कोई गड़बड़ी होगी तो वोट डालने आए और ईवीएम में पड़े वोट की संख्या के मिलान से गड़बड़ी सामने आ जाएगी।
विपक्षी दलों के नेताओं को आशंका है कि वोट डलते वक्त ही मशीनों में चिप के जरिए हेर-फेर हो सकता है। इसलिए इन मांगों के जरिए वो आयोग से चुनाव को पारदर्शी बनाने की बात कहेंगे और अगर आयोग से कोई पारदर्शी और ठोस जवाब नहीं मिला तो इसी लाइन पर अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे। इसके साथ ही विपक्षी दल के नेता अपनी आशंका को जनता की आशंका से जोड़ेंगे। इन्हीं आशंकाओं के आधार पर चुनाव आयोग और अदालत में लोकतंत्र की दुहाई देंगे।
कांग्रेस की रणनीति
खास बात ये है कि, कांग्रेस ने जानबूझकर इस मसले को खुद लीड करने के बजाय शरद पवार को चुना है, जिससे कांग्रेस से दूरी बनाने वाले ज़्यादा से ज़्यादा विपक्षी दल इस मुहिम से जुड़ें और विपक्षी एकता का दबाव दिखाई दे। इसीलिये पवार की सरपरस्ती में कांग्रेस की तरफ से वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस बैठक में हिस्सा लिया।
