भारतीय चुनाव आयोग के भीतर पिछले कुछ महीनों से चल रही प्रशासनिक खींचतान और अंदरूनी विवाद पर आखिरकार पूरी तरह से विराम लग गया है। आयोग ने 4 नवंबर, 2026 को एक नया 'वर्क अलॉकेशन ऑर्डर' (कार्य आवंटन आदेश) जारी कर दिया है। 'टाइम्स नाउ नवभारत' द्वारा हासिल की गई इस नए वर्क ऑर्डर की एक्सक्लूसिव कॉपी से साफ हो गया है कि आयोग के भीतर शीर्ष स्तर पर उपजे गंभीर मतबेदों के बाद यह अब तक का सबसे बड़ा संगठनात्मक कोर्स-करेक्शन (सुधार) है।
इस नए आधिकारिक आदेश के तहत आईटी महानिदेशक (DG IT) सीमा खन्ना की रिपोर्टिंग व्यवस्था को औपचारिक रूप से तय करते हुए प्रशासनिक प्रोटोकॉल को वापस बहाल कर दिया गया है। नए वर्क ऑर्डर के मुताबिक, अब IT/ICT प्रभाग का पूरा जिम्मा वरिष्ठ अधिकारी डॉ. पवन कुमार शर्मा, Sr. DEC (सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर) को सौंप दिया गया है। अब DG (IT) सीमा खन्ना सीधे शीर्ष स्तर पर फाइलें नहीं भेज सकेंगी, बल्कि उन्हें अनिवार्य रूप से Sr. DEC डॉ. पवन कुमार शर्मा (PKS) के माध्यम से ही चुनाव आयुक्त (EC) को रिपोर्ट करना होगा।
क्या था पूरा मामला और 28 जुलाई का विवाद?
इस पूरे विवाद की शुरुआत इसी साल 28 जुलाई को जारी हुए एक विवादास्पद कार्य आवंटन आदेश से हुई थी। उस आदेश से पहले तक चुनाव आयोग के भीतर आईटी (IT) से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां तत्कालीन डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर संजय कुमार संभाल रहे थे।
लेकिन 28 जुलाई को सीनियर डीईसी मनीष गर्ग द्वारा जारी आदेश के जरिए अचानक एकतरफा बदलाव किया गया। आईटी विभाग की पूरी कमान सीधे महानिदेशक (DG IT) सीमा खन्ना को सौंप दी गई और ओवरसाइट चेन (निगरानी कड़ियों) से डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर (DEC) की भूमिका को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया। इसके जरिए सीमा खन्ना के सीधे चुनाव आयोग (कमीशन) को रिपोर्ट करने का रास्ता साफ हो गया था, जिसे लेकर आयोग के भीतर हड़कंप मच गया था।
दोनों चुनाव आयुक्तों ने खोला था मोर्चा, कैबिनेट सचिव तक पहुंचा था मामला
28 जुलाई के इस आदेश के सामने आते ही चुनाव आयोग के दोनों चुनाव आयुक्तों एस.एस. संधू और विवेक जोशी ने इस पर बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया। दोनों आयुक्तों ने इस आदेश की वैधानिकता और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं।
विवाद इस हद तक बढ़ गया था कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस पूरे घटनाक्रम और एक विशेष अधिकारी के कामकाज के तौर-तरीकों को लेकर सीधे देश के कैबिनेट सचिव (Cabinet Secretary) को एक गोपनीय पत्र लिख दिया था। इस पत्र में आयोग के भीतर स्थापित प्रशासनिक व्यवस्था को दरकिनार करने और शक्तियों के केंद्रीकरण (Centralisation) के प्रयासों पर गहरी चिंता जताई गई थी। इस अभूतपूर्व विरोध के चलते ही 28 जुलाई के उस विवादित आदेश को ठंडे बस्ते में डालना पड़ा और उसे कभी जमीन पर लागू नहीं किया जा सका। दिलचस्प बात यह रही कि इस पूरे तनाव के बावजूद DG (IT) सीमा खन्ना अपनी फाइलें पुरानी व्यवस्था के तहत DEC के जरिए ही आगे बढ़ाती रहीं।
संजय कुमार की आयोग से विदाई, मनीष गर्ग के पोर्टफोलियो में बदलाव
इस पूरे विवाद की धुरी रहे पूर्व डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर (DEC) संजय कुमार को लेकर भी बड़ा अपडेट सामने आया है। आयोग के भीतर मचे इस घमासान के बाद संजय कुमार (IAS: 2008: AGMUT कैडर) को समय से पहले ही चुनाव आयोग से कार्यमुक्त कर उनके मूल होम कैडर में वापस भेज दिया गया है। यही वजह है कि 4 नवंबर के नए ऑर्डर में उनका नाम शामिल नहीं है।
दूसरी तरफ, 28 जुलाई को विवादित आदेश जारी करने वाले सीनियर डीईसी मनीष गर्ग के पोर्टफोलियो को भी पुनर्गठित और सीमित कर दिया गया है। 4 नवंबर के नए आदेश के अनुसार, मनीष गर्ग से आईटी विभाग का प्रभार पूरी तरह वापस ले लिया गया है। अब उनके पास केवल 'इलेक्शन प्लानिंग', 'इलेक्शन मैटेरियल्स (EVM)' और 'EDMD' की जिम्मेदारी रहेगी। इसके अलावा वह ज़ोनल स्तर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों का प्रभार संभालेंगे।
4 नवंबर का नया आदेश: ECI का पहला औपचारिक रीसेट
आंतरिक खींचतान और कैबिनेट सचिव तक मामला पहुंचने के बाद, 4 नवंबर को जारी हुआ यह नया कार्य आवंटन आदेश चुनाव आयोग का पहला औपचारिक और लिखित रीसेट है। इस आदेश के जरिए अब सीमा खन्ना के साथ-साथ निदेशक सुभ्रा सक्सेना जैसी अन्य अधिकारियों के लिए भी यह स्पष्ट कर दिया गया है कि वे अपने प्रभागों की फाइलें Sr. DEC (PKS) यानी डॉ. पवन कुमार शर्मा के माध्यम से ही आगे बढ़ाएंगी।
अधिकारियों के मुताबिक, इस नए आदेश के बाद अब आयोग की पुरानी, सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था बहाल हो गई है। इसे मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों के बीच आम सहमति बनाने और आयोग की साख को बनाए रखने के लिए एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब यह साफ है कि आईटी और वोटर डेटाबेस से जुड़ा कोई भी फैसला प्रशासनिक प्रोटोकॉल के तहत सीनियर डीईसी की कड़ी निगरानी से होकर ही गुजरेगा।
