Mahadev Betting App Scam: ₹6,000 करोड़ के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप घोटाले (Mahadev Betting App Scam) के मुख्य प्रमोटर और सरगना सौरभ चंद्राकर (Saurabh Chandrakar) को छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने 8 दिन की सीबीआई कस्टडी (12 नवंबर 2026 तक) में भेज दिया है। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को आरोपी से दिल्ली स्थित मुख्यालय में पूछताछ करने की अनुमति भी दे दी है।
1 नवंबर 2026 को ओमान से प्रत्यर्पित कर भारत लाए गए सौरभ चंद्राकर को ट्रांजिट रिमांड खत्म होने के बाद सीबीआई ने विशेष न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ठाकुर की अदालत में पेश किया था।
सीबीआई का कोर्ट में दावा: क्यों जरूरी है कस्टोडियल रिमांड?
सीबीआई ने अदालत में अपनी रिमांड अर्जी दाखिल करते हुए कहा कि महादेव बेटिंग सिंडिकेट को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकारी कर्मचारियों और प्रभावशाली राजनीतिक हस्तियों को नियमित रूप से भारी 'प्रोटेक्शन मनी' (संरक्षण राशि) दी जा रही थी। सौरभ चंद्राकर की कस्टोडियल पूछताछ निम्नलिखित कारणों से अनिवार्य है:
'प्रोटेक्शन मनी' पाने वाले लोक सेवकों की पहचान: छत्तीसगढ़ पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों, प्रशासनिक अफसरों और राजनीतिक हस्तियों की पहचान करना जिन्होंने रिश्वत लेकर इस अवैध सिंडिकेट को संरक्षण दिया।
मनी ट्रेल और हवाला नेटवर्क: सट्टेबाजी से जुटाए गए हजारों करोड़ रुपये को हवाला चैनलों और फर्जी (Mule) बैंक खातों के जरिए देश से बाहर (दुबई हेड ऑफिस) भेजने के रास्ते को ट्रैक करना।
अवैध संपत्तियों की जब्ती: अपराध से अर्जित काली कमाई से देश और विदेश में खड़ी की गई बेनामी संपत्तियों का पता लगाना।
अन्य मास्टरमाइंड्स का पर्दाफाश: इस रैकेट के अन्य मुख्य लाभांश पाने वालों और सहयोगियों के नामों का खुलासा करना।
कैसे चलता था ₹450 करोड़ महीना कमाने वाला सिंडिकेट?
सीबीआई की जांच में महादेव बुक ऐप के संचालन को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:
मासिक काली कमाई: वर्ष 2020 में कोरोना लॉकडाउन के बाद से सौरभ चंद्राकर और उसका सहयोगी रवि उप्पल (Ravi Uppal) ऑनलाइन सट्टेबाजी से हर महीने लगभग ₹450 करोड़ कमा रहे थे।
70-80% मुनाफा प्रमोटरों की जेब में: सट्टेबाजी से होने वाली कुल अवैध कमाई का 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा मुख्य प्रमोटर (सौरभ और रवि) रखते थे, जबकि बाकी 20-30 फीसदी हिस्सा पैनल और ब्रांच ऑपरेटरों में बांटा जाता था।
फर्जी बैंक खातों का चक्रजाल: अवैध पैसों के लेनदेन के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सैकड़ों कमीशन-आधारित बैंक खाते खोले गए थे।
दुबई 'हेड ऑफिस' व बॉलीवुड कनेक्शन: इस सिंडिकेट का मुख्य संचालन केंद्र ('हेड ऑफिस') दुबई में था, जहां छत्तीसगढ़ के सैकड़ों युवाओं को नौकरी पर रखकर नेटवर्क चलाया जा रहा था। अवैध कमाई का बड़ा हिस्सा बेटिंग ऐप के विज्ञापनों और दुबई में आयोजित होने वाले भव्य स्टार-स्टडेड कार्यक्रमों में खर्च किया जाता था।
