चुनाव आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल में TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर विवाद को लेकर नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी को पत्र लिखा है। ECI ने 17 सितंबर 2026 को उनके 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक करने का फैसला किया है। आयोग ने ऋतब्रत बनर्जी को सूचित किया है कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) के संबंध में आयोग को मिली शिकायतों/अभ्यावेदनों पर चर्चा के लिए 17 सितंबर, 2026 को दोपहर 3 बजे नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में उनके 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ सुनवाई की जाएगी।
चुनाव आयोग गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 'घास के ऊपर दो फूल' वाले चुनाव चिह्न पर अंतरिम आदेश जारी कर सकता है, क्योंकि पार्टी के विरोधी गुटों ने 6 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव में इसी चिह्न पर उम्मीदवार उतारे हैं। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को आयोग की बैठक होगी और TMC के दोनों गुटों को इसमें मौजूद रहने के लिए कहा गया है।
'चुनाव आयोग के पास दूसरे विकल्प भी हो सकते हैं'
चुनाव आयोग ने अभी तक TMC में किसी विवाद को स्वीकार करते हुए कोई औपचारिक घोषणा नहीं की है।एक अधिकारी ने कहा कि पार्टी का चुनाव चिह्न या तो किसी एक गुट को इस्तेमाल करने की इजाजत दी जा सकती है या किसी को भी नहीं; उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग के पास दूसरे विकल्प भी हो सकते हैं।
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नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव के लिए उम्मीदवार उतारे हैं
पश्चिम बंगाल की पूर्व CM ममता और रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दो विरोधी गुटों ने नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के उपचुनाव के लिए आमने-सामने उम्मीदवार उतारे हैं और दोनों ही पार्टी के आधिकारिक चुनाव चिह्न का इस्तेमाल कर रहे हैं।बुधवार को दोनों गुटों के लिए अपने-अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज जमा करने की आखिरी तारीख थी। उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल करने की भी यह आखिरी तारीख थी।
उपचुनाव को ध्यान में रखते हुए कोई अंतरिम फैसला
अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और चुनाव आयोग उपचुनाव को ध्यान में रखते हुए कोई अंतरिम फैसला ले सकता है। EC उपचुनाव से पहले TMC पर नियंत्रण को लेकर विरोधी दावों की सुनवाई कर रहा है, जिसमें पार्टी के मौजूदा संगठनात्मक ढांचे और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की वैधता जैसे मुद्दे शामिल हैं। यह विवाद 22 जून से शुरू हुआ था, जब पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी ने बागी नेताओं की एक बैठक बुलाई थी और एक नई राष्ट्रीय कार्य समिति के गठन की घोषणा की थी, जिसमें अरूप रॉय को अध्यक्ष चुना गया था। रिताब्रत ने दावा किया था कि पार्टी 'संवैधानिक संकट' का सामना कर रही है। उन्होंने तर्क दिया कि TMC के संविधान के अनुच्छेद 20 के तहत हर तीन साल में राष्ट्रीय कार्य समिति का गठन किया जाना जरूरी है।
'EC ही तय करेगा कि कौन सा पक्ष असली है'
उन्होंने कहा कि फरवरी 2022 में बनी पिछली समिति का कार्यकाल फरवरी 2025 में पूरा हो गया था और उसे आगे नहीं बढ़ाया गया था।ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी का कहना है कि विरोधी गुट एक पुराने नियम पर भरोसा कर रहा है और पार्टी के संविधान में बाद में किए गए संशोधनों को नज़रअंदाज कर रहा है। TMC ने विरोधी गुट के उस दावे को भी गलत बताया जिसमें पार्टी के गठन की बात कही गई थी। TMC का कहना है कि संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया के दौरान सार्वजनिक नोटिस जारी किए गए थे और सभी सांसदों और विधायकों को AITC का सदस्य बनाया गया था। पार्टी ने यह भी कहा कि 22 जून की बैठक को वैध संगठनात्मक प्रक्रिया नहीं माना जा सकता, क्योंकि पार्टी की संगठनात्मक कमेटियां बनाने के लिए तय मल्टी-लेयर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था। रिताब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का कहना है कि उनकी 22 जून की बैठक पार्टी के संविधान के अनुसार हुई थी और EC ही तय करेगा कि कौन सा पक्ष असली है।
