Times Now Education Summit: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच नौकरियों और काम करने के तरीकों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। ऐसे में युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती नई तकनीक से डरने की नहीं,बल्कि उसे समझकर अपने कौशल का हिस्सा बनाने की है। ये कहना है आईआईएम नागपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य वैभव डांगे का। उन्होंने कहा कि AI कई तरह के कामों को बदल सकता है, लेकिन रचनात्मकता, संवेदनशीलता और इंसानी जुड़ाव जैसी क्षमताओं की अहमियत बनी रहेगी।
वैभव डांगे बुधवार को टाइम्स नाउ नेटवर्क के 'TimesNow.in एजुकेशन समिट 2026: ग्लोबल टैलेंट की अगली पीढ़ी का निर्माण' कार्यक्रम में शामिल हुए। दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित ताज पैलेस में आयोजित इस समिट में उन्होंने AI, शिक्षा, रोजगार और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से युवाओं को तैयार करने पर अपनी बात रखी।
AI को खतरे की तरह नहीं,एक साधन की तरह देखें
‘स्किलिंग इंडिया: बिल्डिंग द वर्कफोर्स ऑफ टुमॉरो’ विषय पर चर्चा के दौरान डांगे ने कहा कि AI तेजी से काम करने के तरीकों को बदल रहा है। यह जानकारी जुटाने,उसे समझने और कई नियमित कामों को आसान बनाने में मदद कर सकता है। हालांकि, रचनात्मक सोच, नए विचार, संवेदनशीलता और लोगों के साथ जुड़ने जैसी क्षमताओं को पूरी तरह बदलना आसान नहीं है।उन्होंने कहा कि युवाओं को AI से डरने के बजाय इसका सही इस्तेमाल सीखना चाहिए। आने वाले समय में वही लोग आगे बढ़ पाएंगे जो अपनी मानवीय क्षमताओं के साथ तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कर सकेंगे।
हर साल 20 लाख ड्राइवरों की जरूरत
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि देश में लॉजिस्टिक्स सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। इसके बावजूद हर साल करीब 20 लाख ड्राइवरों की जरूरत बताई जाती है। यह इस बात को दिखाता है कि उद्योग की जरूरत और युवाओं को मिल रही ट्रेनिंग के बीच अभी भी बड़ा अंतर है। डांगे के मुताबिक, तकनीक के आने से कुछ पुराने कौशल की जरूरत कम हो सकती है, लेकिन इसके साथ नए तरह के रोजगार और नई विशेषज्ञताएं भी सामने आती हैं। उन्होंने कहा कि कंप्यूटरीकरण के शुरुआती दौर में बैंकिंग सेक्टर में नौकरियां खत्म होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद में नई तकनीकों के संचालन और इस्तेमाल के लिए नए कौशल की जरूरत पैदा हुई।
रटने के बजाय समस्या का समाधान सीखना जरूरी
उन्होंने कहा कि भविष्य की शिक्षा व्यवस्था में केवल जानकारी याद कराने पर जोर नहीं होना चाहिए। छात्रों में जिज्ञासा, आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और समस्या का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना जरूरी है। डांगे ने कहा कि शिक्षा संस्थानों को ऐसे युवाओं को तैयार करना चाहिए जो केवल परीक्षा के सवालों के जवाब देने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज और देश के सामने आने वाली समस्याओं को समझकर उनके समाधान तलाश सकें।
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के पास कितनी भी पेशेवर क्षमता क्यों न हो,लेकिन अगर उसके काम में नैतिकता और चरित्र नहीं है तो उसकी विशेषज्ञता अधूरी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक अच्छे डॉक्टर या वकील के लिए सिर्फ पेशेवर दक्षता पर्याप्त नहीं है। उनके काम में नैतिकता और जिम्मेदारी भी जरूरी है।
