SIR Row: देश में चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। 30 सितंबर 2026 को शाम 4:30 बजे नई दिल्ली स्थित निर्वाचन सदन में यह बैठक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई, जिसमें दोनों चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी मौजूद रहे। इस बैठक में राज्यों में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की समीक्षा के बाद कई अहम फैसले लिए गए।
आयोग ने आंध्र प्रदेश और मेघालय में SIR की समयसीमा बढ़ाने का औपचारिक फैसला लिया है। नए कार्यक्रम के तहत आंध्र प्रदेश में नोटिस जारी करने, दावों और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगी, जिसके बाद 16 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी। वहीं, मेघालय के लिए अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन अब 26 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा।
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दिल्ली में दावों व आपत्तियों की बढ़ाई गई तारीख
इसके अलावा दिल्ली में दावों व आपत्तियों की तारीख 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है। आयोग ने साफ किया है कि बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पहले ही पूरा हो चुका है और जो लोग छूट गए हैं, वे निरंतर अद्यतनीकरण (Continuous Updation) के तहत अपने नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म भर सकते हैं।
इंडिया गठबंधन में किन-किन मुद्दों पर हुई बात?
दूसरी तरफ, विपक्षी गठबंधन INDIA अलायंस ने चुनाव आयोग और मतदाता सूचियों के मुद्दे पर अपना आंदोलन और तेज करने की रणनीति तैयार कर ली है। बुधवार को लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद गठबंधन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जानकारी दी कि आगामी 6 अक्टूबर को विपक्षी दलों के सभी सांसद मिलकर चुनाव आयोग तक मार्च निकालेंगे। इसके अलावा, अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति से मुलाकात कर अपनी शिकायतों से जुड़ा ज्ञापन सौंपेगा और 1 नवंबर को दिल्ली में एक विशाल रैली का आयोजन किया जाएगा।
तमाम विपक्षी नेता हुए एकजुट
इस बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत कई शीर्ष नेता शामिल हुए। जहां एक ओर चुनाव आयोग अपने सभी कदमों को कानून के मुताबिक बता रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष का यह आक्रामक रुख आने वाले दिनों में देश के राजनीतिक माहौल को और गरमाने के संकेत दे रहा है।
