Gaganyaan Mission: भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान ने गुरुवार को बड़ी उपलब्धि हासिल की। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने गगनयान के लिए तैयार किए गए ड्रोग पैराशूट का सफल परीक्षण किया है।
ड्रोग पैराशूट का कहां हुआ परीक्षण?
रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि यह परीक्षण 18 फरवरी को चंडीगढ़ स्थित टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) में डीआरडीओ की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (RTRS) सुविधा में किया गया।
बकौल मंत्रालय, गगनयान मिशन के लिए ड्रोग पैराशूट का परीक्षण 'क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट' था, जिसमें पैराशूट को उड़ान के दौरान पड़ने वाले अधिकतम दबाव से भी ज्यादा भार पर परखा गया।
इसमें कहा गया, ''इस सफल परीक्षण से यह साबित हुआ कि भारत हाई-स्ट्रेंथ रिबन पैराशूट के डिजाइन और निर्माण में सक्षम है। यह परीक्षण इसरो के विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर, डीआरडीओ की एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट और टीबीआरएल की टीमों के सहयोग से किया गया।
RTRS एक खास डायनामिक टेस्ट फैसिलिटी है जिसका इस्तेमाल हाई-स्पीड एयरोडायनामिक और बैलिस्टिक परीक्षणों के लिए किया जाता है। इस परीक्षण ने यह भी दिखाया कि पैराशूट के डिजाइन में अतिरिक्त सुरक्षा मार्जिन मौजूद है।
ISRO ने भी किया था सफल परीक्षण
इससे पहले, इसरो ने ने ड्रोग पैराशूट डिप्लॉयमेंट क्वालिफिकेशन टेस्ट को सफलतापूर्वक पूरा किया था। इसरो ने TBRL के RTRS फैसिलिटी में 18 और 19 दिसंबर 2025 को हुआ था। इस परीक्षण का उद्देश्य गगनयान क्रू मॉड्यूल में इस्तेमाल होने वाले ड्रोग पैराशूट को जांचना था कि समय आने पर यह अपना काम सही ढंग से कर पाता है या नहीं। बकौल इसरो, अलग-अलग उड़ान परिस्थितियों में किए गए इन परीक्षणों में ड्रोग पैराशूट भरोसेमंद साबित हुआ।
गगनयान का सिस्टम
गगनयान क्रू मॉड्यूल के डीसेलेरेशन सिस्टम में कुल 10 पैराशूट हैं, जो 4 अलग-अलग प्रकार के हैं। सबसे पहले 2 एपेक्स कवर सेपरेशन पैराशूट खुलते हैं, जो पैराशूट कक्ष का सुरक्षा कवर हटाते हैं। इसके बाद 2 ड्रोग पैराशूट, जो मॉड्यूल को स्थिर करते हैं और उसकी रफ्तार कम करते हैं। ड्रोग के रिलीज होने के बाद 3 पायलट पैराशूट डिप्लॉय किए जाते हैं ताकि तीन मेन पैराशूट बाहर निकल सकें, जो क्रू मॉड्यूल की स्पीड को और कम कर सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करते हैं।
