बिहार के छपरा में जहरीली शराब के सेवन से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसको लेकर LJP (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। सच दबाया जा रहा है। पोस्टमार्टम किए बिना अंतिम संस्कार करवाया गया। परिवार पर दवाब डालाते हुए बोला जा रहा है कि मत बोलो कि शराब से मौत हुई है नहीं तो जेल भेज देंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की खामोशी भ्रष्ट अधिकारियों को समर्थन है।
जहरीली शराब पीने से मरने वालों संख्या शुक्रवार को बढ़कर 30 हो गई। छह साल पहले शराबबंदी की घोषणा के बाद मृतकों की यह संख्या सबसे अधिक है। सारण जिले के डीएम राजेश मीणा ने बताया कि मंगलवार रात से शुक्रवार तक मृतकों संख्या बढ़कर 30 हो गई है। हालांकि, अपुष्ट खबरों में दावा किया गया है कि जहरीली शराब पीने से 50 से अधिक लोगों की मौत हुई है। डीएम अपनी इस बात पर कायम रहे कि ये मौतें संदिग्ध जहरीली शराब के सेवन से हुई हैं। जिसकी पुष्टि फोरेंसिक लैब में मृतकों के विसरा टेस्ट के बाद होगी।
यह मामला राज्य विधानसभा में भी छाया रहा, क्योंकि बीजेपी के सदस्यों ने राजभवन तक मार्च निकालने से पहले दोनों सदनों में कार्यवाही बाधित की। गुरुवार को नीतीश कुमार ने भड़कते हुए कहा था कि जो पिएगा वो मरेगा। कोई सहानुभूति नहीं है और कोई मुआवजा नहीं मिलेगा। जिसकी काफी आलोचना हुई थी।
नीतीश कुमार सीपीआई के विधायक सत्येंद्र यादव की इस दलील पर आपत्ति जताते हुए अपनी कुर्सी से उठे थे कि सरकार शोक संतप्त परिवार के सदस्यों को आर्थिक मुआवजा देने पर विचार कर रही है। घटना से व्यथित सीएम नीतीश ने कहा कि कृपया इस तरह का रुख न लें। मैंने हमेशा लेफ्ट पार्टियों को अपने सहयोगियों के रूप में देखा है। उन्होंने कहा कि अगर आप लोगों को लगता है कि शराबबंदी गलत है, तो इसे स्पष्ट रूप से कहें। कानून को सभी की सहमति से लाया गया था। अगर आज सभी सोचते हैं कि हम गलत थे, तो हम इसे वापस ले सकते हैं। साथ ही सीएम ने कहा कि लेकिन याद रखें कि इस गंदी आदत के कारण ये मौतें हुई हैं। उन्होंने दोहराया, जो पिएगा वो मरेगा।
