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Delhi Blast : आतंकी डॉक्टर उमर का मां-भाई से DNA हुआ मैच, 10 नवंबर को विस्फोट वाली I-20 कार वही चला रहा था

डीएनए सैंपल मैच हो जाने के बाद इस बात की पुष्टि हो गई है कि विस्फोट वाली कार उमर ही चला रहा था। सूत्रों का कहना है कि ब्लास्ट के बाद आई 20 कार से मिली हड्डियों, दांत, कपड़ों के टुकड़े से DNA का मैच हुआ। इससे अब यह भी साफ हो गया है कि ब्लास्ट में मरने वाला उमर ही था।

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दिल्ली ब्लास्ट वाली कार उमर ही चला रहा था। तस्वीर-PTI

Photo : PTI

Delhi Blast : दिल्ली ब्लास्ट मामले में बड़ी खबर आई है। आतंकी डॉक्टर उमर उन नबी का डीएनए सैंपल उसकी मां और भाई से मैच हो गया है। डीएनए सैंपल मैच हो जाने के बाद इस बात की पुष्टि हो गई है कि विस्फोट वाली कार उमर ही चला रहा था। ब्लास्ट के बाद आई-20 कार से मिली हड्डियों, दांत, कपड़ों के टुकड़े से DNA का मैच हुआ। इससे अब यह भी साफ हो गया है कि ब्लास्ट में मरने वाला उमर ही था। बताया जाता है कि उसने 6 दिसंबर को बड़ा हमला करने की साजिश रची थी। छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी है।

6 दिसंबर को बड़ी आतंकी घटना करना चाहता था उमर

दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले का रहने वाला डॉ. उमर (28 साल) लाल किला विस्फोट में मारा गया। बीते सोमवार शाम करीब सात बजे हुए इस धमाके में 12 लोगों की जान चली गई जबकि 20 अन्य लोग घायल हुए। डॉक्टर उमर कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक फैले आतंकी मॉड्यूल में शामिल था। हालांकि, उमर का बड़ा प्लान नाकाम हो गया, क्योंकि उसके निशाने पर अयोध्या भी था। उसकी तैयारी थी कि बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी यानी 6 दिसंबर को बड़े पैमाने पर घटना को अंजाम देना।

लगभग आधी दिल्ली का चक्कर लगाया

सूत्रों के मुताबिक पुलिस के पास डॉ. उमर के करीब 50 जगहों के सीसीटीवी फुटेज है। यानी डॉक्टर उमर जब फरीदाबाद से दिल्ली में घुसा तो इसने लगभग आधी दिल्ली का चक्कर लगाया। दिल्ली पुलिस मैपिंग के हिसाब से 3 बजे से पहले इसने दिल्ली की कई जगहों पर गाड़ी घुमाई। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक पहले ये फरीदाबाद के दक्षिण पूर्व जिलों में कई जगह देखा गया। वहां से पूर्वी जिला फिर पूर्वी जिला और दिल्ली के कई इलाकों से होता हुआ मध्य जिला आया। यहां से वह मस्जिद गया, फिर 3 :19 बजे लाल किला के पार्किंग पहुंचा।

गिरफ्तार किये गए आठ लोगों से हुई पूछताछ

रिपोर्टों में अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि फरीदाबाद स्थित अंतरराज्यीय जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) आतंकी मॉड्यूल से कथित संबंध रखने के आरोप में गिरफ्तार किये गए आठ लोगों से पूछताछ तथा उनके परिवार, दोस्तों और पड़ोसियों से बातचीत के आधार पर इस षडयंत्र के विवरण के बारे में पता चला। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के डॉक्टर नबी (28) के कश्मीर, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में फैले आतंकवादी नेटवर्क का प्रमुख सदस्य होने की बात सामने आई है। वह 10 नवंबर को लाल किला के पास हुए विस्फोट में मारा गया, जिसमें 12 लोगों की जान चली गई। फरीदाबाद के अल फलाह विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले डॉ. मुज़म्मिल अहमद गनई उर्फ मुसैब की गिरफ़्तारी के कारण उसकी योजना धरी की धरी रह गई। मुसैब के कमरे से 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट बरामद हुआ था।

2021 में तुर्किये गया था उमर

अधिकारियों ने बताया कि ऐसा माना जा रहा है कि नबी घबरा गया था और विस्फोट दुर्घटनावश हुआ था। अधिकारियों के अनुसार, नबी का शैक्षणिक रिकॉर्ड बहुत अच्छा था। उन्होंने दावा किया कि गनई के साथ 2021 में तुर्किये की यात्रा ने उसके अंदर नाटकीय बदलाव और कट्टरपंथ की भावना पैदा की। गनई जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा गिरफ्तार किये गए आठ लोगों में पहला व्यक्ति था। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान दोनों की मुलाकात प्रतिबंधित जैश-ए-मोहम्मद के सक्रिय कार्यकर्ताओं से हुई।

वीबीआईईडी को तैयार कर रहा था

यात्रा के बाद, बदले हुए नबी ने गनई के साथ मिलकर अमोनियम नाइट्रेट, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर सहित विस्फोटक कथित तौर पर इकट्ठा करना शुरू कर दिया तथा उन्हें अल फलाह परिसर में और उसके आसपास जमा करना शुरू कर दिया, जहां वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा था। अधिकारियों के अनुसार, नबी ने दिसंबर में अपने आतंकी मंसूबे के बारे में दूसरों को बताया और 10 नवंबर को जिस हुंदै आई20 कार को वह चला रहा था, उसमें विस्फोटक सामग्री रखकर इसकी तैयारी शुरू कर दी थी। अधिकारियों ने कहा कि ऐसा लगता है कि वह इंटरनेट पर उपलब्ध मुक्त स्रोतों से इसके निर्माण और विस्फोट करने में सहायक सर्किट के बारे में सीखने के बाद एक वाहन-आधारित संवर्धित विस्फोटक उपकरण (वीबीआईईडी) को तैयार कर रहा था।

360 किग्रा ज्वलनशील पदार्थ भी शामिल था

अधिकारियों के अनुसार, नबी 10 नवंबर को उस समय घबरा गया होगा, जब फरीदाबाद के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने टेलीविजन पर घोषणा की कि वहां 2,900 किलोग्राम विस्फोटक बरामद करके एक आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया गया है। इस 2,900 किग्रा विस्फोटक में गनई के किराये के मकान से बरामद 360 किग्रा ज्वलनशील पदार्थ भी शामिल था। अधिकारियों ने बताया कि नबी ने चारदीवारी वाली एक मस्जिद में पनाह ली, जहां वह सोमवार शाम तीन घंटे रुका और फिर गाड़ी चलाते हुए निकल गया जिसमें समय से पहले ही विस्फोट हो गया। उन्होंने बताया कि वीबीआईईडी भी अधूरा था, क्योंकि छर्रे जोड़े जाने बाकी थे।

गिरफ्तार किये गए आठ लोगों में से सात कश्मीर से

गिरफ्तार किये गए आठ लोगों में से सात कश्मीर से हैं। इनमें श्रीनगर के नौगाम से आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद, शोपियां से मौलवी इरफान अहमद, गांदरबल के वाकुरा इलाके से ज़मीर अहमद अहंगर उर्फ मुतलाशा, पुलवामा के कोइल इलाके से डॉ. मुज़म्मिल अहमद गनई उर्फ मुसैब और कुलगाम के वानपोरा इलाके से डॉ. अदील शामिल हैं। वहीं, डॉ. शाहीन सईद लखनऊ से है। अधिकारियों ने बताया कि 26 अक्टूबर को नबी कश्मीर गया था और फरीदाबाद लौटने से पहले अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ कुछ समय बिताया। उन्होंने बताया कि इस यात्रा के दौरान उसने अपने करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों से कहा था कि वह अगले तीन महीनों तक उपलब्ध नहीं रहेगा।

कुछ समय के लिए भूमिगत हो जाना चाहता था

उन्होंने बताया कि इस बयान की पुष्टि उसके कई दोस्तों, पूछताछ किये गए रिश्तेदारों और पुलिस के सामने पेश किये गए अन्य सह-आरोपियों ने की है। ऐसा लगता है कि वह वीबीआईईडी की योजना बनाकर कुछ समय के लिए भूमिगत हो जाना चाहता था। हालांकि, श्रीनगर में जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर लगाने के एक मामले में श्रीनगर पुलिस की गहन जांच के बाद गनई की गिरफ़्तारी होने पर योजना ने ‘यूटर्न’ ले लिया। ये पोस्टर 19 अक्टूबर को शहर की दीवारों पर चिपकाये गए थे। यहीं से जांच शुरू हुई। सीसीटीवी फुटेज में गनई और कुछ अन्य लोगों को इस कृत्य में शामिल देखा गया, जिसके बाद अंतरराज्यीय आतंकी नेटवर्क का पर्दाफ़ाश हुआ।

Anuj Mishra
अनुज मिश्राauthor

अनुज मिश्रा भारत के अग्रणी क्राइम और इन्वेस्टिगेटिव पत्रकारों में से एक हैं। वह वर्तमान में टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। पिछले करीब दो दशकों से अनुज मिश्रा ने अपराध, आंतरिक सुरक्षा और संगठित अपराध से जुड़े मामलों की गहन रिपोर्टिंग और संपादकीय नेतृत्व किया है। उन्होंने सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग, एनआईए और खुफिया एजेंसियों से संबंधित बड़ी और संवेदनशील खबरों को नज़दीकी से कवर किया है। अनुज मिश्रा की सबसे बड़ी ताक़त उनकी ग्राउंड रिपोर्टिंग है। हर बड़ी और अहम खबर में वह ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद रहकर घटनाओं की प्रत्यक्ष कवरेज करते रहे हैं। यही कारण है कि उनकी रिपोर्टिंग में जमीनी सच्चाई और तथ्य हमेशा साफ़ झलकते हैं। टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ने से पहले अनुज मिश्रा देश के कई बड़े टेलीविज़न न्यूज़ चैनलों के साथ काम कर चुके हैं, जहां उन्होंने अपनी पत्रकारिता और एडिटोरियल स्किल्स से अलग पहचान बनाई। अनुज ने न केवल देश-विदेश की बड़ी खबरों को जनता तक पहुँचाया है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति और सत्ता गलियारों से जुड़े घटनाक्रमों पर भी पैनी नज़र रखी है। उनकी पत्रकारिता शैली तथ्यपरक, इन्वेस्टिगेटिव और जमीनी हकीकत पर आधारित मानी जाती है। उन्होंने आतंकवाद, संगठित अपराध, ड्रग्स सिंडिकेट, हाई-प्रोफाइल जांच और सियासी घटनाक्रमों पर कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स की हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

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