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संसद में आज बड़ी बहस, 'ऑपरेशन सिंदूर' पर आज बोलेंगे PM मोदी, अमित शाह, विपक्ष के सवालों का देंगे जवाब

सोमवार को लोकसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 22 अप्रैल से 17 जून के बीच कोई सीधा संवाद नहीं हुआ।’ उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल को ट्रंप ने पहलगाम हमले के बाद मोदी से बात की थी और 17 जून को मोदी की कनाडा यात्रा के दौरान दोनों की फोन पर बात हुई थी।

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'ऑपरेशन सिंदूर' पर जारी चर्चा का जवाब देंगे पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह। तस्वीर-PTI

Photo : PTI

Debate on Operation Sindoor in Parliament: संसद में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर चर्चा जारी है। चर्चा के पहले दिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विपक्ष के आरोपों और सवालों के जवाब दिए। समाचार एजेंसी एएनआई ने सरकार के सूत्रों के हवाले से कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को लोकसभा में 'ऑपरेशन सिंदूर' पर बयान देंगे। लोकसभा में गृह मंत्री 12 बजे बयान देंगे जबकि पीएम शाम करीब 4 बजे निम्न सदन को संबोधित करेंगे। सोमवार को विपक्ष के कई सवालों का जवाब रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री ने दिया। साथ ही आतंकवाद और देश की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस की नीतियों एवं फैसलों पर भी सवाल उठाए।

22 अप्रैल से 17 जून तक ट्रंप से कोई बातचीत नहीं हुई-जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका से बातचीत में किसी भी स्तर पर व्यापार के विषय का कोई लेना-देना नहीं था और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 22 अप्रैल से 17 जून तक कोई बातचीत नहीं हुई। ऑपरेशन सिंदूर विषय पर लोकसभा में चर्चा में भाग लेते हुए जयशंकर ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस दौरान अमेरिका से बातचीत में व्यापार से जुड़ा कोई मुद्दा नहीं आया।

17 जून को मोदी-ट्रंप के बीच फोन पर हुई बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संघर्ष रुकवाने के दावों को लेकर विपक्ष के सवालों पर जयशंकर ने कहा, ‘प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 22 अप्रैल से 17 जून के बीच कोई सीधा संवाद नहीं हुआ।’ उन्होंने बताया कि 22 अप्रैल को ट्रंप ने पहलगाम हमले के बाद मोदी से बात की थी और 17 जून को मोदी की कनाडा यात्रा के दौरान दोनों की फोन पर बात हुई थी। पहलगाम हमले के बाद भारत को विदेश से समर्थन नहीं मिलने के विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्यों में से पाकिस्तान और तीन अन्य देशों को छोड़कर सभी ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का समर्थन किया था।

यह पूछना चाहिए दुश्मन के कितने विमान गिराए-राजनाथ

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सवाल उठाने वाले विपक्ष के नेताओं को निशाने पर लेते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस अभियान में भारत के कितने विमान गिरे, यह पूछने के बजाय यह पूछना चाहिए कि देश की सेनाओं ने दुश्मन के कितने विमान गिराये और सुझाव दिया कि अभियान की सफलता पर बात की जानी चाहिए। लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा की शुरुआत करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, ‘विपक्ष के लोग पूछते रहे हैं कि हमारे कितने विमान गिरे। मुझे लगता है कि उनका यह प्रश्न हमारी राष्ट्रीय जनभावनाओं का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता।’

'हमारी सेनाओं ने आतंकियों के आकाओं को मिटाया'

रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने एक बार भी हमसे यह नहीं पूछा कि हमारी सेनाओं ने दुश्मन के कितने विमान मार गिराए? यदि उन्हें प्रश्न पूछना ही है तो यह पूछना चाहिए कि क्या भारत ने आतंकवादी ठिकानों को तबाह किया, तो उसका उत्तर है ‘हां’। उन्होंने कहा, ‘मैं विपक्ष से पूछना चाहता हूं कि आपको प्रश्न पूछना है तो यह पूछिए कि क्या ऑपरेशन सिंदूर सफल रहा तो उसका उत्तर है ‘हां’। आपको प्रश्न पूछना है तो यह प्रश्न पूछिए कि जिन आतंकियों ने हमारी बहनों, हमारी बेटियों का सिंदूर मिटाया, क्या हमारी सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर में उन आतंकियों के आकाओं को मिटाया तो इसका उत्तर है ‘हां’।’

Alok Rao
आलोक कुमार रावauthor

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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