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UP के ये 2 हादसे त्योहारों में सबक, ट्रैक्टर से हर रोज 10 और शॉर्ट सर्किट से 4 की मौत

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  • Updated Oct 3, 2022, 01:45 PM IST

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार साल 2021 में ट्रैक्टर पर सवारी के दौरान 5652 लोग घायल हुए । और इसमें 3899 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। इसी तरह 2021 में शॉर्ट सर्किट के 1808 हादसे हुए और इसकी वजह से 1657 लोगों की मौत हो गई। नियमों की अनदेखी हादसे की एक बड़ी वजह है।

KEY HIGHLIGHTS
  • कानपुर में ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर गिर गई और उसमें सवार 26 लोगों की मौत हो गई ।
  • भदोही में दुर्गा पांडाल में आग लगने से 5 लोगों की मौत हुई है।
  • गाइडलाइन और कानून होने के बावजूद, आम लोगों के अलावा प्रशासन भी अनदेखी करता है ।

Accidents in India:त्याहारों के मौसम (Festival Season) में जरा सी लापरवाही खुशियों को मातम में बदल देती है। हाल ही में उत्तर प्रदेश में हुए दो हादसे सबक हैं कि हमें ऐसे कदमों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, जो हमारे लिए जानलेवा बन सकते हैं। पहला हादसा उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur Tractor Accident)का है, शनिवार को एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्राली अनियंत्रित होकर पानी से भे खंती में गिर गई और उसमें सवार 26 लोगों की मौत हो गई ।

दूसरी घटना भदोही (Bhadohi) जिले की है। जहां रविवार देर रात दुर्गा पूजा पांडाल में आग (Bhadohi Durga Puja Fire) लग गई। खबर लिखे जाने तक 5 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 52 लोग झुलस गए। हादसा शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) से हुआ। जिसकी वजह से निकली चिंगारी से पांडाल में आग लग गई। इन घटनाओं से सबसे पहला सवाल यही उठता है कि ट्रैक्टर-ट्राली जो सामान ढुलाई में इस्तेमाल किया जाता है, तो उस पर 40 से ज्यादा लोग बैठ कर क्यों जा रहे थे। इसी तरह भदोही हादसे से सवाल उठता है कि जब शॉर्ट सर्किट से हमेशा हादसे का डर होता है, तो फिर सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए जाते हैं। तो इसका सीधा जवाब है लापरवाही और नियमों की अनदेखी। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली की वजह से हर रोज 10 लोग मौत के शिकार हो रहे हैं, इसी तरह शॉर्ट सर्किट से हर रोज 4 लोगों की मौत हो जा रही है।

ट्रैक्टर यात्रा की लिए नहीं

ग्रामीण लोगों को हाइवे और दूसरे रास्तों पर किसी ट्रैक्टर-ट्रॉली पर बैठकर यात्रा करते हुए देखना आम बात है। अक्सर ट्रैक्टर-ट्रॉली पर 15-20 लोग बैठे हुए लोग सफर करते हुए दिख जाते हैं। उनके लिए न केवल यह ट्रांसपोर्ट का आसान जरिया है, बल्कि वह पैसों की भी बचत करता है। लेकिन यही लापरवाही हर साल हजारों लोगों के लिए जानलेवा बन जाती है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार साल 2021 में ट्रैक्टर पर सवारी के दौरान 5652 लोग घायल हुए । और इसमें से 3899 लोगों ने अपनी जान गंवाई है। यानी हर रोज 10 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। इसी तरह 2019 में 3336 और 2018 में 4451 लोगों ने जान गंवाई है।

सालट्रैक्टर से हुई सड़क दुर्घटना में मौतें
20213899
20203346
20194451

शॉर्ट सर्किट को न करें नजरअंदाज

ऐसा ही हाल शॉर्ट सर्किट का है। जिसे आम तौर पर लोग देख कर भी इग्नोर कर देते हैं। और फिर वहीं लापरवाही बड़े हादसे की वजह बन जाती है। जैसा कि भदोही में हुआ। वहां पर जेनरेटर से निकली चिंगारी ने पांडाल में आग लगा दी और उसकी कीमत 5 लोगों को अपनी जान गंवाकर चुकानी पड़ी। NCRB के आंकड़ो को देखा जाय तो साल 2021 में शॉर्ट सर्किट के 1808 हादसे हुए और इसकी वजह से 1657 लोगों की मौत हो गई।

नियमों का सख्ती से पालन बेहद जरूरी

अगर ट्रैक्टर और शॉर्ट सर्किट को देखा जाय तो साफ है कि तय नियमों और गाइडलाइन के नहीं पालन से ही हादसे हो रहे हैं। मसलन ट्रैक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल अगर ग्रुप में यात्रा के लिए किया जाय तो निश्चित तौर पर भारी जुर्माना लगाना चाहिए। साथ ही लोगों को भी समझना होगा कि जरा सी बचत कैसे जान गंवाने की वजह बन सकती है। इसी तरह मेले,पांडाल लगाए जाए, तो सरकार द्वारा जारी सुरक्षा मानकों का बेहद कड़ाई से पालन आयोजकों द्वारा किया जाना जरूरी है। इसके अलावा उनका सख्ती से पालन भी जरूरी है। इसके लिए पुलिस और संबंधित विभाग गाइडलाइन जारी करते हैं। जिनको नजरअंदाज करने बड़े हादसे को दावत देने जैसा है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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