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सावधान! हैलो...मैं दिल्ली पुलिस का अधिकारी बोल रहा हूं, और खाता हो रहा खाली

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jun 14, 2023, 07:39 PM IST

Cyber Crime: हेम्योपैथी डॉक्टर दीपांजन देब से साइबर ठगी हुई है। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें एक दिन कॉल आया और कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया था। इसके बाद उनके खाते से 70 हजार रुपये उड़ गए।

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साइबर फ्रॉड

Photo : BCCL

Cyber Crime: देश में बीते कुछ सालों में साइबर अपराधों के मामले बढ़े हैं। साइबर अपराधी लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं, लेकिन अब कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिसमें साइबर अपराधी सीधे तौर पर पुलिस के नाम पर ठगी कर रहे हैं और लोगों के खातों से मोटी रकम निकाल ले रहे हैं।

ऐसा ही एक मामला हाल ही में सामने आया है, जिसमें पुलिस के नाम पर जोगाबाई एक्सटेंशन के हेम्योपैथी डॉक्टर दीपांजन देब से साइबर ठगी हुई है। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि उन्हें एक दिन कॉल आया और कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया था। दीपांजन देब ने इस कॉल को वैध माना, क्योंकि एक दिन पहले ही उनका पर्स चोरी हो गया था। उन्होंने ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के लिए कॉल करने वाले व्यक्ति को एक ओटीपी बताया, जिके बाद उनके खाते से 70 हजार रुपये निकाल लिए गए। जैसे ही उन्हें इसका पता चला, उन्होंने अपने एटीएम कार्ड ब्लॉक कराया और मामले की रिपोर्ट कराई।

सर्तकता बचाएगी ठगी से

इसी तरह शक्ति विहार के रहने वाले व्यवसायी जयेश मिश्रा, साइबर फ्रॉड का शिकार होने से बच गए। उन्होंने बताया, मुझे एक दिन रात करीब 10 बजे फोन आया। सामने वाले व्यक्ति ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताया। उन्होंने कहा, मैं सोने की तैयारी कर रहा था, तभी फोन करने वाले व्यक्ति ने मुझे बताया कि मेरे भाई का एक्सीडेंट हो गया है और उसे अस्पताल ले जाया गया है। उन्होंने बताया, सामने वाले व्यक्ति ने फोन पर उनसे कहा कि निजी अस्पताल में इलाज के लिए पैसों का भुगतान करना होगा, जिसके बाद डॉक्टर उसका इलाज शुरू करेंगे। उन्होंने कहा, यह सुनकर मैं घबरा गया। उन्होंने बताया, जब उस व्यक्ति ने मुझे मेरे भाई के बारे में बताया, तभी मुझे याद आया कि मेरा भाई कुछ जरूरी काम से पटना गया हुआ है। इसके तुरंत बाद मैंने अपने भाई के नंबर पर फोन किया और उसके हाल-चाल लिए। उन्होंने कहा, इसके बाद मैंने तुरंत उस नंबर को ब्लॉक कर दिया।

दिल्ली पुलिस ने जारी की एडवाइजरी

इस तरह के मामले समाने आने के बाद दिल्ली पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर कहा है कि दिल्ली पुलिस या किसी अन्य प्रवर्तन एजेंसी के साथ संबद्धता का दावा कर साइबर अपराधी आपके साथ्ज्ञ ठगी के कर रहे हैं। ऐसा कोई भी संदिग्ध फोन आने पर हमें सूचित करें। नई दिल्ली के साइबर पुलिस स्टेशन के एसएचओ विजय पाल ने बताया हमें हर दिन कम से कम आठ लोगों के फोन आ रहे हैं, जो शिकायत कर रहे हैं कि दिल्ली पुलिस के नाम पर उनके साथ धोखाधड़ी की गई है। अधिकांश कॉलों में, शिकायतकर्ताओं ने उल्लेख किया कि उन्हें कॉल करने वाले व्यक्ति ने रोहिणी में पुलिस अधीक्षक होने का दावा किया था। वास्तव में हमने उस पद पर किसी को नियुक्त ही नहीं किया है। इसलिए हम लोगों को ऐसी कॉल्स से सावधान रहने और सुरक्षित रहने की सलाह दे रहे हैं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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