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देश में कम उम्र के लोगों की अचानक क्यों हो रही मौत? ICMR की स्टडी आई सामने, वैक्सीनेशन नहीं... यह है कारण

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Nov 21, 2023, 11:29 AM IST

ICMR Study: भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR)की एक स्टडी सामने आई है। इसमें कहा गया है कि देश में अचानक हो रही मौतों का कोविड वैक्सीन से कोई संबंध नहीं है। स्टडी का हवाला देते हुए युवाओं में अचानक मौत के जोखिम की असल वजह बताई गई है।

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अचानक हो रही मौतों पर ICMR की स्टडी आई सामने

Photo : BCCL

ICMR Study: कोरोना महामारी के बाद देश में हार्ट अटैक के कारण अचानक हो रही मौतों की संख्या बढ़ गई है। अभी हाल ही में गुजरात में गरबा उत्सव के दौरान कई मौतें हुई थीं। इसके अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में भी कभी जिम करते हुए तो कभी अचानक सड़क पर मौतों के ऐसे ही मामले सामने आए। इन मामलों में देखा गया कि हार्ट अटैक से होने वाली मौतों में ज्यादातर संख्या कम उम्र के लोगों की ही है। इसके बाद चर्चा होने लगी कि इसका कारण कोरोना वैक्सीन है और देश के वैक्सीनेशन प्रोग्राम पर ही सवाल खड़े होने लगे।

हालांकि, अब भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR)की एक स्टडी सामने आई है। इसमें कहा गया है कि देश में अचानक हो रही मौतों का कोविड वैक्सीन से कोई संबंध नहीं है। आईसीएमआर ने मौतों के अन्य कारणों पर प्रकाश डाला है और स्टडी का हवाला देते हुए युवाओं में अचानक मौत के जोखिम की असल वजह बताई है।

ICMR की स्टडी में क्या?

आईसीएमआर ने कहा है कि देश में अचानक हो रही मौतों का कारण कोरोना वैक्सीन नहीं है। संस्थान ने कहा है कि कोविड-19 से पहले अस्पताल में भर्ती होना, परिवार में अचानक मौतें होने के पुराने केस और लाइफस्टाइल में बदलाव ने ऐसे मामलों की संभावना को बढ़ा दिया है। स्टडी में यह भी कहा गया है कि अगर किसी ने कोरोना वैक्सीन की कम से कम एक भी डोज ली है तो उसपर कोरोना वायरस से होने वाली मौत का खतरा कम हो जाता है।

यह भी है एक बड़ा कारण

आईसीएमआर ने 1 अक्टूबर 2021 से लेकर 31 मार्च 2023 तक इस विषय पर स्टडी की है। स्टडी में कहा गया है कि कोविड की वजह से अस्पताल में भर्ती होने की हिस्ट्री, परिवार में होने वाली अचानक मौतों की हिस्ट्री और मौत से 48 घंटे पहले शराब पीना, ड्रग्स लेना या फिर अधिक मात्रा में एक्सरसाइज करना भी इसके कारणों में शामिल है। आईसीएमआर ने इस स्टडी में देश के 47 अस्पतालों को शमिल किया था, जिसमें 18 से 45 साल की उम्र वाले लोग शामिल थे।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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