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बढ़ते कोरोना वायरस के बीच बड़ा अपडेट, कोविशील्ड-कोवैक्सिन वाले भी लगवा सकेंगे 'कोवोवैक्स' का बूस्टर

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Apr 11, 2023, 09:44 AM IST

Covovax: सीरम इंस्टीट्यूट ने 27 मार्च को कोवोवैक्स के लिए आवेदन किया था, जिसके बाद इसे मंजूरी दे दी गई है। इस वैक्सीन को हेटेरोलॉगस बूस्टर खुराक के रूप में कोविन पोर्टल में शामिल किया जाएगा।

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कोवोवैक्स को मिली मंजूरी

Photo : BCCL

Covid-19 Vaccine: देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच बड़ा अपडेट सामने आया है। अब वयस्क बूस्टर खुराक के रूप में सीरम इंस्टीट्यूट के कोवोवैक्स टीके को भी लगवा सकते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने सोमवार को कोवोवैक्स को कोविन पोर्टल में शामिल करने की मंजूरी दे दी। खास बात यह है कि कोवोवैक्स को हेटेरोलॉगस बूस्टर खुराक के रूप में मंजूरी दी गई है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आपने किसी कोई अन्य टीका लगवाया है, तो भी कोवोवैक्स को बूस्टर खुराक के रूप में लगवाया जा सकता है।

केंद्र की इस मंजूरी के बाद कोविशील्ड या कोवैक्सिन की दो खुराक ले चुके लोगों के सामने बूस्टर खुराक के रूप में एक और विकल्प मिलेगा। कोविन पोर्टल पर जल्द ही कोवोवैक्स टीका उपलब्ध होने की संभावना है। सीरम इंस्टीट्यूट की ओर से 27 मार्च को इसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में आवेदन किया गया था।

कीमतें भी हुईं तय

भारत में कोवोवैक्स की बूस्टर खुराक की कीमतें भी तय कर दी गई हैं। जानकारी के मुताबिक, कोवोवैक्स की कीमत 225 रुपये या इससे कुछ ज्यादा होगी। सीरम इंस्टीट्यूट की ओर से लिखे गए पत्र में कहा गया था कि कोवोवैक्स को कई संस्थाओं द्वारा मंजूरी दी गई है, यह एक विश्वसनीय टीका है। इस ताजा अपडेट के बाद कोविशील्ड या कोवैक्सिन की दो खुराक ले चुके वयस्क कोवोवैक्स को बूस्टर खुराक के रूप में लगवा सकते हैं।

देश में कोरोना की स्थिति गंभीर

यह अपडेट देश में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच आया है। बता दें, देश में कोरोना संक्रमण एक बार फिर से तेजी से पैर पसार रहा है। दिल्ली, मुंबई, केरल, गुजरात, हिमाचल प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में नए मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। देश में प्रतिदिन पांच हजार से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं, जिसके बाद देश में एक्टिव कोरोना मरीजों की संख्या 35 हजार पार कर गई है। इसी के साथ दैनिक संक्रमण दर में भी इजाफा हुआ है। डराने वाली बात यह है कि बढ़ते संक्रमण के बीच दैनिक कोरोना से दैनिक मृत्यु का आंकड़ा भी तेज से बढ़ता जा रहा है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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