Maneka Gandhi Comments On Stray Dogs : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी द्वारा आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की आलोचना करने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्होंने अदालत की अवमानना की है। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारी की पीठ ने कहा कि पूर्व मंत्री ने बिना सोचे-समझे सभी के खिलाफ हर तरह की टिप्पणियां की हैं।
मेनका गांधी ने हर तरह की टिप्पणियां की हैं
मेनका गांधी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन से सवाल करते हुए पीठ ने कहा, आपने कहा कि अदालत को टिप्पणी करते समय सतर्क रहना चाहिए, लेकिन क्या आपने अपनी मुवक्किल से पूछा है कि उन्होंने किस तरह की टिप्पणियां की हैं? क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना है? उन्होंने बिना सोचे-समझे सभी के खिलाफ हर तरह की टिप्पणियां की हैं। क्या आपने उनकी बॉडी लैंग्वेज देखी है?
पूछा- मेनका ने बजट आवंटन में क्या योगदान दिया है?
पीठ ने कहा कि अदालत की उदारता के कारण वह पूर्व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं कर रही है। न्यायमूर्ति मेहता ने रामचंद्रन से पूछा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री के रूप में मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों की समस्या के उन्मूलन के लिए बजट आवंटन में क्या योगदान दिया है। रामचंद्रन ने जवाब दिया कि वह आतंकवादी अजमल कसाब की ओर से भी पेश हो चुके हैं और बजट आवंटन एक नीतिगत मामला है।
अजमल कसाब ने अदालत की अवमानना नहीं की
जस्टिस नाथ ने टिप्पणी की, अजमल कसाब ने अदालत की अवमानना नहीं की, लेकिन आपके मुवक्किल ने की है। पीठ ने कहा कि कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जवाबदेह ठहराने वाली उनकी टिप्पणी व्यंग्यपूर्ण नहीं बल्कि गंभीर थी, हालांकि यह मामले की सुनवाई के दौरान हुई बातचीत में कही गई थी।
मामले की सुनवाई अभी जारी है।
13 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह राज्यों को कुत्ते के काटने की घटनाओं के लिए भारी मुआवजा देने का आदेश देगा और ऐसे मामलों के लिए कुत्तों को खाना खिलाने वालों को जवाबदेह ठहराएगा। अदालत ने पिछले पांच वर्षों से आवारा पशुओं से संबंधित नियमों के लागू न होने पर भी चिंता जताई।
