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चुनावों में कांग्रेस को क्यों मिली करारी? CWC की बैठक में नतीजों पर हुआ मंथन

Congress Working Committee Meeting: कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में चुनावी नतीजों पर मंथन हुआ। सीडब्ल्यूसी की बैठक दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और सांसद राहुल गांधी, केरल के वायनाड से लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी में हुई।

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CWC की बैठक में मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी।

CWC Meet on Election Result: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इतनी बुरी तरह हार क्यों मिली? हरियाणा में भी कांग्रेस की उम्मीदों पर पानी फिर गया। ऐसे में सवाल ये उठने लगे कि क्या कांग्रेस अपनी कमियों को नजरअंदाज कर चुनावी मैदान में ताल ठोक रही है? ऐसे तमाम मुद्दों को लेकर मंथन किया गया। कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की शुक्रवार को आयोजित बैठक में हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों तथा कुछ अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई।

चुनावी नतीजों पर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने किया मंथन

कांग्रेस मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में हुई इस बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश और पार्टी के कई अन्य नेता शामिल हुए। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस कार्य समिति चुनाव नतीजों के साथ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से जुड़े मुद्दे पर अपनी राय जाहिर कर सकती है।

महाराष्ट्र में महाविकास अघाडी को मिली करारी शिकस्त

कांग्रेस और उसके सहयोगियों को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है। इससे पहले उसे हरियाणा में भी आश्चर्यजनक हार का सामना करना पड़ा था। कार्य समिति की बैठक में दिल्ली विधानसभा चुनाव तथा देश के कुछ अन्य राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

हाल ही में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 16 विधानसभा सीटों पर जीत नसीब हुई। 288 सीटों के लिए हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम में भाजपा ने सबसे अधिक 132 सीटों पर जीत दर्ज की। जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने 57 सीट और अजित पवार की एनसीपी ने 41 सीट अपने नाम की। महाविकास अघाडी में शामिल उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूटीबी) को 20 सीट, जबकि शरद पवार की एनसीपी (एसपी) ने 10 सीट पर जीत हासिल की।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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