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सुप्रीम कोर्ट ने गोवा में प्राइवेट फॉरेस्ट लैंड रूपांतरण पर लगाई रोक, तो कांग्रेस ने सीएम प्रमोद सावंत को घेरा; जानें पूरा माजरा

तमाम विपक्षी पार्टियां एक के बाद एक ज्लवंत मुद्दों पर गोवा की सरकार को रडार पर ले रही हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत पर तीखा प्रहार किया है। इधर सुप्रीम कोर्ट ने गोवा में प्राइवेट फॉरेस्ट लैंड रूपांतरण पर रोक लगा दी, तो उधर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बुधवार को सीएम सावंत पर कटाक्ष किया है।

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गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने उठाए सवाल।

गोवा में निजी वन भूमि के रूपांतरण पर हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने रियल एस्टेट हितों को फायदा पहुंचाने के लिए पर्यावरण संरक्षण के नियमों को दरकिनार किया। विवाद की जड़ में है वर्ष 2021 में राज्य सरकार द्वारा गठित की गई ‘रिव्यू कमेटी (RC-II)’, जिसे पहले की थॉमस एंड अराउजो कमेटी द्वारा चिह्नित की गई प्राइवेट फॉरेस्ट भूमि का पुनर्मूल्यांकन करने का काम सौंपा गया था। RC-II ने 271 सर्वे नंबरों को 'वन भूमि' की श्रेणी से हटाकर, 1.2 करोड़ वर्ग मीटर से अधिक भूमि को संभावित विकास के लिए खोल दिया।

कांग्रेस नेता ने गोवा सरकार और सीएम सावंत को घेरा

इस फैसले की तीखी आलोचना करते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में गोवा की प्राइवेट फॉरेस्ट भूमि के रूपांतरण पर कम से कम अस्थायी तौर पर रोक लगाई है। इससे पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी स्पष्ट निर्देश दिए थे कि डिनोटिफाइड फॉरेस्ट भूमि पर विकास तब तक न हो जब तक भौतिक सत्यापन पूरा न हो जाए। लेकिन यह प्रक्रिया कभी पूरी नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट का आदेश सिर्फ एक अस्थायी राहत है। असली लड़ाइयां अभी बाकी हैं, क्योंकि गोवा के मुख्यमंत्री का पूरा ध्यान इन वनों को रियल एस्टेट विकास के लिए खोलने पर है।"

सर्वे नंबर 257/1 को लेकर उठ रहे हैं सबसे अधिक सवाल

इससे पहले सितंबर 2023 में NGT ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह RC-II द्वारा डिनोटिफाई की गई भूमि का भौतिक सत्यापन करे और जब तक यह प्रक्रिया पूरी न हो, तब तक किसी भी प्रकार की विकास अनुमति न दी जाए। इस मामले में सांकोले के सर्वे नंबर 257/1 को लेकर सबसे अधिक सवाल उठ रहे हैं, जहां अब एक बड़ा कमर्शियल प्रोजेक्ट प्रस्तावित है।

सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद कांग्रेस ने मांग की है कि RC-II की संपूर्ण प्रक्रिया का ऑडिट कराया जाए, डिस्प्यूटेड प्लॉट्स पर सभी विकास कार्यों पर रोक लगे, और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत (जो उस समय वन विभाग भी संभाल रहे थे) से जवाबदेही तय की जाए।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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