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नारायण मूर्ति के समर्थन में MP मनीष तिवारी, बोले- सप्ताह में 70 घंटे काम करना चाहिए, हम भी रोज 12-15 घंटे करते हैं काम

  • Authored by: रामानुज सिंह
  • Updated Nov 10, 2023, 11:15 AM IST

प्रति सप्ताह 70 घंटे काम को लेकर इंफोसिस के सह-संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति की सलाह का कांग्रेस नेता और सांसद मनीष तिवारी ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि सप्ताह के सातों दिन रोज 12-15 घंटे काम करते हैं।

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सप्ताह में 70 घंटे काम को लेकर नारायण मूर्ति के समर्थन में आए मनीष तिवारी

देश की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने यानी विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवाओं को प्रति सप्ताह 70 घंटे काम करने की इंफोसिस के सह-संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति की सलाह पर चल रही बहस में सीनियर कांग्रेस नेता मनीष तिवारी भी कूद पड़े। तिवारी ने नारायण मूर्ति का समर्थन करते हुए कहा कि 1 दिन की छुट्टी और एक साल में 15 दिनों की छुट्टियों के साथ सप्ताह में 70 घंटे काम करना चाहिए। ऐसा कानून बनाया जाना चाहिए। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में कांग्रेस सांसद ने कहा कि विभिन्न जन प्रतिनिधि और निर्वाचित सांसद सार्वजनिक सेवा के साथ करियर को संतुलित करते हुए सप्ताह के सातों दिन रोज 12-15 घंटे काम करते हैं।

उन्होंने कहा कि सप्ताह में 70 घंटे काम को लेकर इंफोसिस एनमूर्ति के बयान को लेकर हंगामा किया जा रहा है। उसे मैं समझ नहीं पा रहा हूं। इसमें गलत क्या है? हममें से कुछ जन प्रतिनिधि सार्वजनिक सेवा के साथ करियर को संतुलित करते हुए सप्ताह के सातों दिन 12-15 घंटे काम करते हैं। तिवारी ने आगे कहा कि वह रविवार को भी काम करते हैं और उन्हें यह भी याद नहीं है कि आखिरी बार उन्होंने वीकेंड में कब छुट्टी ली थी। उन्होंने कहा कि मुझे याद नहीं है कि मैंने आखिरी बार रविवार की छुट्टी कब ली थी। रविवार को निर्वाचन क्षेत्र में पूर्ण कार्य दिवस भी होता है। चाहे आप निर्वाचित हों या नहीं।

उन्होंने आगे कहा कि अगर भारत और उसके युवाओं को अपनी प्रोडक्टिविट बढ़ाने की जरूरत है तो एक दिन की छुट्टी के साथ सप्ताह में 70 घंटे काम करना एक पॉलिसी होनी चाहिए बशर्ते कि पर्याप्त काम हो। उन्होंने कहा कि अगर भारत को वास्तव में शक्तिशाली देश बनना है तो एक या दो पीढ़ियों को सप्ताह में 70 घंटे अपनी वर्क पॉलिसी बनानी होगी। एक दिन की छुट्टी के साथ सप्ताह में 70 घंटे और एक वर्ष में 15 दिन की छुट्टियों का नियम बनाना चाहिए। बशर्ते कि काम की कमी नहीं होनी चाहिए।

गौर हो कि हाल ही में इंफोसिस के पूर्व सीएफओ मोहनदास पई के साथ बातचीत में नारायणमूर्ति ने कहा था कि दुनिया के टॉप अर्थव्यवस्था वाले देशों से साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए युवाओं को काम पर अतिरिक्त घंटे लगाने चाहिए। उन्होंने कहा था कि भारत की वर्क प्रोडक्टिविटी दुनिया में सबसे कम में से एक है। जब तक हम अपनी वर्क प्रोडक्टिविटी में सुधार नहीं करते हैं तो हम उन देशों के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएंगे जिन्होंने जबरदस्त प्रगति की है। अगर हम चीन और जापान जैसे सबसे तेजी से बढ़ते देशों के साथ प्रतिस्पर्धा करना चाहते हैं तो हमें अपनी वर्क प्रोडक्टिविटी बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा था कि इसलिए मेरा अनुरोध है कि हमारे युवाओं को कहना चाहिए, यह मेरा देश है। मैं सप्ताह में 70 घंटे काम करना चाहूंगा।

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रामानुज सिंह
रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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