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क्या अरविंद केजरीवाल को मिलेगी जमानत? सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा फैसला

CBI केस में अरविंद केजरीवाल की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला कल सुनाएगी। सीएम केजरीवाल द्वारा जमानत की मांग करते हुए और कथित उत्पाद शुल्क नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई द्वारा उनकी गिरफ्तारी को बरकरार रखने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है।

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सुप्रीम कोर्ट अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर कल सुनाएगा फैसला

Photo : टाइम्स नाउ डिजिटल

Arvind Kejriwal: सुप्रीम कोर्ट कल यानि शुक्रवार को सीबीआई (CBI) मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर फैसला सुनाएगा। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति मामले में जमानत मांगने और सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी दोनों याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। वहीं दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े सीबीआई मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की न्यायिक हिरासत 25 सितंबर तक बढ़ा दी।

21 मार्च को सीएम केजरीवाल को किया गया था गिरफ्तार

दिल्ली के सीएम 21 मार्च से हिरासत में हैं, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें अब समाप्त हो चुकी दिल्ली आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं के लिए गिरफ्तार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही ईडी मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत दे दी है। हालांकि, वह फिलहाल CBI मामले में जेल में हैं। आप प्रमुख को 26 जून को भ्रष्टाचार के एक मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि इस बात के सबूत हैं कि आप प्रमुख ने गोवा चुनाव में 40 निर्वाचन क्षेत्रों के प्रत्येक उम्मीदवार को 90 लाख रुपये देने का वादा किया था। और यह पैसा कथित तौर पर अब समाप्त हो चुकी दिल्ली शराब नीति से अवैध रूप से एकत्र किए गए धन से आया था।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर रखा था फैसला सुरक्षित

उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली आबकारी नीति मामले में सीबीआई द्वारा अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को चुनौती देने और अंतरिम जमानत की मांग करने वाली उनकी याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया। सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मुख्यमंत्री केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने शीर्ष अदालत को बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने मामले की विस्तार से सुनवाई करने के बावजूद उनकी जमानत याचिका पर कोई आदेश पारित नहीं किया। सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 1 जुलाई से हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई शुरू की। केजरीवाल की ओर से दो रिट याचिकाएं दायर की गई थीं। एक सीबीआई की गिरफ्तारी की वैधता के खिलाफ और दूसरी जमानत के लिए। 17 जुलाई को हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर फैसला सुरक्षित रख लिया था, लेकिन बाद में जमानत पर फिर से फैसला सुनाया गया। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा जमानत पर गुण-दोष के आधार पर सुनवाई करने के बावजूद जमानत पर कोई आदेश नहीं सुनाया गया।

केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने उच्च न्यायालय के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक महीने बाद, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने कहा कि मैं जमानत पर फैसला नहीं करने का फैसला करता हूं और मुझे जमानत के लिए ट्रायल कोर्ट में वापस जाने को कहा। सर्वोच्च न्यायालय के 13 फैसले हैं जो जमानत में देरी की निंदा करते हैं और आपको वापस भेजते हैं। मुझे वापस भेजने का क्या मतलब था? हालांकि, सीबीआई की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने शीर्ष अदालत को बताया कि उच्च न्यायालय ने समवर्ती क्षेत्राधिकार के प्रश्न की जांच की है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने दलीलें सुनते हुए मौखिक टिप्पणी की। आदर्श रूप से, उच्च न्यायालय को इस प्रश्न पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए। उच्च न्यायालय को उसी दिन आदेश पारित कर देना चाहिए था, जिस दिन नोटिस जारी किया गया था।

अदालत ने सीबीआई द्वारा अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार करने के तरीके पर भी सवाल उठाया। पीठ ने टिप्पणी कि जब आप हिरासत में हैं...यदि आप उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर रहे हैं, तो आपको अदालत की अनुमति की आवश्यकता होगी। दंड प्रक्रिया संहिता में कुछ है। सिंघवी ने तर्क दिया कि सीबीआई ने बीमा गिरफ्तारी की, क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि केजरीवाल जल्द ही ईडी मामले में जमानत हासिल कर लेंगे, जो उन्होंने अंततः हासिल कर लिया। उन्होंने आगे बताया कि मामले में सभी सह-आरोपी मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, विजय नायर और बीआरएस नेता के कविता को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी थी।

Shashank Shekhar Mishra
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शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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