Ram Mandir Trust CEO: अयोध्या के भव्य राम मंदिर का कामकाज और वित्तीय प्रबंधन अब पूरी तरह पेशेवर और पारदर्शी होने जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया शनिवार शाम चार बजे समाप्त हो रही है। चयन प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस बेहद महत्वपूर्ण पद को पाने की दौड़ में देश के सेवानिवृत्त नौकरशाह (रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स) और बड़े अधिकारी सबसे आगे चल रहे हैं।
यह चयन प्रक्रिया मंदिर (Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra) के इतिहास में एक बड़ा मोड़ है, क्योंकि हाल ही में राम मंदिर में चढ़ावे की रकम के कथित गबन का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट ने प्रशासनिक ढांचे में व्यापक बदलाव का फैसला किया है। इसी के तहत वित्तीय प्रबंधन को मजबूत करने, संस्थागत जवाबदेही तय करने और मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज को सुचारू बनाने के उद्देश्य से पहली बार 'सीईओ' का यह नया पद बनाया गया है। राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा के अनुसार, नए सीईओ की मुख्य जिम्मेदारी 'ट्रस्ट में भक्तों का अटूट विश्वास बनाए रखना' और तीर्थयात्रियों के लिए बेहतरीन सुविधाएं सुनिश्चित करना होगी।
कम से कम 20 साल का प्रबंधकीय अनुभव होना अनिवार्य
इस पद के लिए योग्यता की शर्तें भी काफी दिलचस्प और सख्त रखी गई हैं। अधिसूचना के मुताबिक, आवेदक की उम्र 50 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए और उसके पास किसी बड़े सार्वजनिक संगठन या सरकारी विभाग में कम से कम 20 साल का प्रबंधकीय अनुभव होना अनिवार्य है। इसके अलावा, आवेदक का एक 'सक्रिय हिंदू' होना जरूरी है, जिसमें वैष्णव परंपरा से जुड़े भगवान राम के भक्तों को प्राथमिकता दी जाएगी।
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बनाई गई एक तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति
चयन की प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष रखने के लिए एक तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति बनाई गई है। इस समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और एनआईटी रायपुर के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हवारे शामिल हैं। यह समिति प्राप्त हुए सभी बायोडेटा की छंटनी करेगी और योग्य उम्मीदवारों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करने के बाद केवल तीन नाम ट्रस्ट को सौंपेगी। अंतिम नियुक्ति का अधिकार पूरी तरह ट्रस्ट के पास होगा, जिसकी स्वतंत्र कमान सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत चलती है और इस पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।
वर्तमान में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव बनाया गया है। न्यासी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद ट्रस्ट में अभी 13 सदस्य बचे हैं। माना जा रहा है कि 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इन खाली पदों को भरा जाएगा, जिसके बाद नए सीईओ के नाम पर अंतिम मुहर लग जाएगी। शुरुआत में यह नियुक्ति तीन साल के कॉन्ट्रैक्ट पर होगी।
