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Chhattisgarh: 8 नक्सलियों के खात्मे के बाद पुलिस ने किया बड़ा खुलासा, बीजापुर में बड़ी घटना टली; 25 किलो के IED नष्ट

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में मारे गए नक्सलियों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। बीजापुर पुलिस ने बताया है कि उसूर-आवापल्ली मुख्य मार्ग पर उसूर से 3 किलोमीटर की दूरी पर धान मंडी के पास सड़क पर माओवादियों द्वारा लगाए गए 25 किलो के IED को BDS टीम ने खोजकर नष्ट कर दिया। सड़क के बीचोबीच प्लास्टिक के कंटेनर में IED रखा गया था ।

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बीजापुर पुलिस ने 25 किलो के आईईडी को किया नष्ट।

Bijapur Police Destroyed 25 kg IED: छत्तीसगढ़ में बीजापुर पुलिस को रविवार को बड़ी सफलता मिली है। उसूर-आवापल्ली मुख्य मार्ग पर उसूर से 3 किलोमीटर की दूरी पर धान मंडी के पास सड़क पर माओवादियों द्वारा लगाए गए 25 किलो के आईईडी को बीडीएस टीम ने खोजकर नष्ट कर दिया। माओवादियों ने सड़क के बीचों-बीच प्लास्टिक के कंटेनर में आईईडी को रखा था।

पुलिस ने 25 किलो के आईईडी को किया नष्ट

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, माओवादियों ने बड़े वाहनों को नुकसान पहुंचाने की नीयत से कमांड स्वीच सिस्टम से आईईडी को मुख्यमार्ग पर प्लास्टिक के कंटेनर में रखा था। आईईडी से आम जनता को नुकसान हो सकता था। सुरक्षाबलों को क्षति पहुचाने की नीयत से आम जनता की जान की परवाह किए बगैर इस प्रकार मुख्यमार्ग पर आईईडी प्लांट करना, माओवादियों की बौखलाहट को दर्शाता है। सुरक्षाबलों द्वारा माओवादियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि उनके नापाक मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे।

छत्तीसगढ़ के बीजापुर में बड़ी घटना टली

बता दें कि छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का लगातार अभियान जारी है। बीजापुर में बीते शनिवार को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में आठ नक्सलियों को मार गिराया था। मुठभेड़ स्थल से सुरक्षाबलों ने इंसास राइफल, बीजीएल लॉन्चर सहित कई हथियार भी बरामद किए थे।

बीजापुर में थाना गंगालूर क्षेत्र में 31 जनवरी को डीआरजी, एसटीएफ, कोबरा 202 एवं केंद्रीय रिजर्व पुलिस 222 वाहिनी की संयुक्त टीम को पश्चिम बस्तर डिवीजन के प्रतिबंधित नक्सली संगठन के नक्सलियों के मौजूद होने की गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने नक्सल विरोधी अभियान शुरू किया। अभियान के दौरान शनिवार सुबह करीब 8:30 बजे से कोरचोली-तोड़का के जंगलों में सुरक्षाबलों और और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। काफी देर तक रुक-रुक कर फायरिंग जारी रही। मुठभेड़ में 8 नक्सलियों मारे गए थे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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