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छत्तीसगढ़: मुखबिरी के शक में महिला आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की हत्या, शव चौराहे पर रख माओवादियों ने फेंके पर्चे

Chhattisgarh News: अधिकारियों ने बताया कि मौके से प्रतिबंधित संगठन CPIM मडायी एरिया कमेटी की ओर से जारी पर्चा बरामद किया गया है। पर्चे में माओवादियों ने मृतका पर पुलिस मुखबिर होने का आरोप लगाया है।

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Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ के बीजापुर में एक बार फिर माओवादियों ने वारदात को अंजाम दिया है। बीजापुर पुलिस ने बताया कि तिम्मापुर गांव में माओवादियों ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लक्ष्मी पदम नामक महिला की गला घोंटकर कल रात हत्या कर दी। इसके बाद उन्होंने चौराहे पर महिला के शव को फेंक दिया। महिला पर पुलिस का मुखबिर होने का शक था, जिसके चलते उसकी हत्या की गई।

अधिकारियों ने बताया कि मौके से प्रतिबंधित संगठन CPIM मडायी एरिया कमेटी की ओर से जारी पर्चा बरामद किया गया है। पर्चे में माओवादियों ने मृतका पर पुलिस मुखबिर होने का आरोप लगाया है। शव को कब्जे में ले लिया गया है। मामला दर्ज कर जांच की जा रही है। इससे पहले बीजापुर जिले में नक्सलियों ने पुलिस का मुखबिर होने के शक में बुधवार को दो पूर्व सरपंच की अपहरण के बाद हत्या कर दी थी।

पांच नक्सलियों ने किया सरेंडर

शुक्रवार को बीजापुर जिले में पांच नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। इनमें से तीन पर कुल 11 लाख रुपये का इनाम है। बीजापुर जिले के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि नक्सलियों ने पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में से एक संतु कोड़मे माओवादियों की पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) कंपनी नंबर दो का सक्रिय सदस्य है। कोड़मे पर आठ लाख रुपए का इनाम है।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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