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Naxalites Encounter: सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, एनकाउंटर में मारे गए 9 नक्सली

Chhattisgarh Breaking News: सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ में 9 नक्सलियों का खात्मे की खबर सामने आई है। सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों के साथ गोरीबारी शुरू हो गई। इस दौरान पुलिस ने 9 नक्सलियों को मार गिराया। सर्च ऑपरेशन में कई स्वचालित हथियार बरामद किए गए हैं।

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सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में 9 नक्सली मारे गए।

Big Breaking: पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा-बीजापुर सीमा पर जंगल में मुठभेड़ के दौरान 9 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि की है। पुलिस का कहना है कि नक्सलियों के पास से स्वचालित हथियार बरामद किए गए हैं। दंतेवाड़ा के एसपी गौरव राय ने कहा कि नक्सलियों के पास से बड़ी संख्या में एसएलआर राइफल, .303 राइफल और .315 बोर राइफल (SLR/.303 Rifle/.315 Bore Rifle) बरामद की गई हैं। ऑपरेशन में शामिल सभी सुरक्षा बल के जवान सुरक्षित बताए जा रहे हैं। इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है। ऑपरेशन पूरा होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी। खबर लिखे जाने तक ये जानकारी सामने आई कि दंतेवाड़ा-बीजापुर के बॉर्डर पर फिलहाल सर्च ऑपरेशन जारी है।

सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़

इससे पहले आज दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों के सीमावर्ती इलाके में पश्चिम बस्तर संभाग के माओवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने पर एक संयुक्त पुलिस दल सर्च ऑपरेशन पर निकला था। मंगलवार सुबह 10:30 बजे पुलिस, सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ शुरू हुई। इस बीच, पिछले हफ्ते 29 अगस्त को नारायणपुर के अबूझमाड़ के घने जंगलों में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में तीन महिला नक्सली मारी गईं उनकी पहचान उत्तर बस्तर डिवीजन कमेटी और पीएलजीए कंपनी नंबर 5 के सदस्यों के रूप में की गई है।

संयुक्त टीम ने इस ऑपरेशन में लिया था हिस्सा

जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और सीमा सुरक्षा बल की संयुक्त टीम ने इस ऑपरेशन में हिस्सा लिया था। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, मौके से 303 राइफल और 315 बोर की बंदूक समेत भारी मात्रा में हथियार और नक्सली सामग्री बरामद की गई है।

अमित शाह ने पिछले महीने दिया था ये आश्वासन

24 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आश्वासन दिया था कि सरकार मार्च 2026 तक देश को नक्सलवाद से मुक्त करने में सक्षम होगी। शाह छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ क्षेत्र में वामपंथी उग्रवाद को लेकर एक अंतर-राज्यीय समन्वय बैठक में हिस्सा ले रहे थे। केंद्रीय गृह मंत्री ने नक्सल उग्रवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित नौ राज्यों के भीतर रेड कॉरिडोर के रूप में जाने जाने वाले क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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