मानसून और उसके बाद के महीनों में डेंगू और मलेरिया के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए देशभर में डेंगू और मलेरिया से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों को व्यापक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए।
बैठक में स्वास्थ्य मंत्रालय, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR), राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (NCVBDC) और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
‘सतर्कता में कोई ढिलाई नहीं’
बैठक के दौरान नड्डा ने स्पष्ट कहा कि डेंगू और मलेरिया जैसी मच्छरजनित बीमारियों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र, राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। उन्होंने राज्यों को निगरानी तंत्र (Surveillance System) मजबूत करने, मामलों की त्वरित रिपोर्टिंग और संभावित प्रकोपों पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।टाइम्स नाउ नवभारत पर इसे भी पढ़ें- राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को झटका, भाजपा समर्थित निर्दलीय परिमल नाथवानी और JMM के बैजनाथ राम ने मारी बाजी
अस्पताल रहें पूरी तरह तैयार
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने देशभर के अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिया कि वे किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें। उन्होंने कहा कि मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की बाधा नहीं आनी चाहिए।
- पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
- जांच सुविधाओं को मजबूत किया जाए।
- रक्त और रक्त घटकों का पर्याप्त भंडार रखा जाए।
- अस्पतालों में पर्याप्त बेड उपलब्ध हों।
- प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए।
इलाज के तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन होगा
जेपी नड्डा ने डेंगू और मलेरिया के उपचार संबंधी मानक दिशानिर्देशों (Standard Treatment Guidelines) के सख्त पालन पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों को नवीनतम उपचार प्रोटोकॉल की जानकारी दी जाए ताकि मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सके।
मच्छरों के खिलाफ चलेगा व्यापक अभियान
बैठक में डेंगू और मलेरिया की रोकथाम के लिए मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान तय किया गया कि जलभराव रोकने के लिए अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा, मच्छरों के लार्वा नष्ट करने की कार्रवाई की जाएगी। साथ ही फॉगिंग अभियान चलाया जाएगा। वहीं संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी और हॉटस्पॉट की पहचान और वहां मच्छरों पर नियंत्रण के लिए व्यापक कदम चलाए जाएंगे।
जन-जागरूकता अभियान होंगे और तेज
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आम जनता की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने राज्यों को बड़े पैमाने पर सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) अभियान चलाने के निर्देश दिए। इस दौरान लोगों को जागरूक किया जाएगा कि वे- घर और आसपास साफ-सफाई रखें।
- कहीं भी पानी जमा न होने दें।
- मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
- बुखार या अन्य लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), पंचायतों, स्कूलों और सामाजिक संगठनों को भी इस अभियान में जोड़ने की बात कही गई।
जिला स्तर पर बनेगी विशेष रणनीति
नड्डा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले की स्थिति के अनुसार अलग-अलग माइक्रो प्लान तैयार किए जाएं। विशेष रूप से उन इलाकों पर फोकस किया जाए जहां डेंगू और मलेरिया का खतरा अधिक रहता है। उन्होंने कहा कि प्रभावी निगरानी, शीघ्र जांच और समय पर इलाज से बीमारी के बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
मलेरिया के खिलाफ भारत की बड़ी सफलता
बैठक में भारत की मलेरिया नियंत्रण उपलब्धियों की भी समीक्षा की गई। भारत में 2015 से 2025 के बीच मलेरिया के मामलों और मौतों में लगभग 80% की कमी आई है। इसमें बताया गया कि साल 2024 में भारत ने वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के हाई बर्डन टू हाई इम्पैक्ट (HBHI) समूह से बाहर निकलने में सफलता हासिल की। समीक्षा के दौरान सामने आया कि भारत वैश्विक मलेरिया नियंत्रण लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यहां के 160 जिलों में 2022 से 2025 के बीच एक भी स्थानीय मलेरिया मामला दर्ज नहीं हुआ।बैठक के अंत में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि डेंगू और मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में जन-जागरूकता, समय पर जांच, त्वरित इलाज और सामुदायिक भागीदारी ही सबसे मजबूत हथियार हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और राज्यों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
