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VIDEO: 'जिंदगी में ये तीन बातें हमेशा याद रखना...', अजीत डोभाल का 50 साल पुराना किस्सा, जब लगा था करियर खत्म हो गया; फिर मिला एक मंत्र

आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में NSA अजीत डोभाल ने अपने करियर के शुरुआती दौर का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि एक मुश्किल दौर में एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा ने उन्हें जिंदगी को ‘मैप रीडिंग’ की तरह देखने का मंत्र दिया था—पहले जानो कि आप कहां हैं, फिर तय करो कि कहां जाना है और वहां पहुंचने का रास्ता क्या है।

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जब अजीत डोभाल को लगा था करियर खत्म हो गया! शेरपा ने बताया जिंदगी का ‘मैप रीडिंग’ मंत्र।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने करियर के शुरुआती दौर का एक ऐसा किस्सा सुनाया, जब उन्हें लगा था कि उनकी पेशेवर जिंदगी पूरी तरह पटरी से उतर गई है। डोभाल ने बताया कि उस मुश्किल दौर में उनके साथ काम करने वाले एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा ने उन्हें जिंदगी को देखने का एक अलग नजरिया दिया था। उन्होंने इसे ‘मैप रीडिंग’ से जोड़ते हुए तीन अहम बातें बताई थीं।

जब एक खुफिया टीम चीन की हिरासत में पहुंच गई

डोभाल ने बताया कि अपने करियर के शुरुआती वर्षों में वह सिक्किम में खुफिया जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उस समय सीमा क्षेत्र में गतिविधियों पर नजर रखना और चीनी सेना की गतिविधियों की जानकारी जुटाना भी उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा था।

एक बार उनकी एक खुफिया टीम को सीमा के पास एक मिशन पर भेजा गया। टीम को कुछ दिनों में वापस लौटना था, लेकिन कई दिन बीतने के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला। डोभाल ने बताया कि पांच, दस और फिर करीब 15 दिन बीत गए और टीम वापस नहीं आई।

बाद में मुख्यालय से उन्हें जानकारी मिली कि उनकी टीम चीन की हिरासत में है। पूछताछ के बाद टीम को वापस छोड़ा गया, लेकिन जब सदस्य लौटे तो वे मानसिक और शारीरिक रूप से काफी टूटे हुए थे।

डोभाल को लगा- अब करियर खत्म हो जाएगा

इस घटना के बाद जांच शुरू हुई। डोभाल ने बताया कि उस समय उन्हें लगा कि उन्होंने अपने करियर में बहुत बड़ी गलती कर दी है और अब उनका करियर खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि वह बेहद दुखी थे। उन्हें लग रहा था कि जिस करियर में वह बहुत उम्मीद और महत्वाकांक्षा के साथ आए थे, उसमें सब कुछ गलत हो गया है। लेकिन जांच में उन्हें दोषी नहीं पाया गया। उनके मुताबिक, जिस नक्शे और स्केच के आधार पर मिशन की योजना बनाई गई थी, उसमें ही गलतियां थीं।

तिब्बती शेरपा ने पूछा- ‘सर, आप इतने दुखी क्यों हैं?’

डोभाल ने बताया कि उस मुश्किल समय में उनके साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो में काम करने वाले एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा ने उनसे पूछा कि वह इतने दुखी क्यों हैं। डोभाल ने उसे बताया कि वह बड़ी उम्मीदों और आकांक्षाओं के साथ इस करियर में आए थे, लेकिन ऐसा लग रहा है कि सब कुछ गलत हो गया है। इस पर शेरपा ने उनसे कहा कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है। उसने इसे ‘मैप रीडिंग का चक्कर’ बताया।

डोभाल के मुताबिक, पहाड़ों में वर्षों तक काम कर चुके उस शेरपा ने उन्हें समझाया कि जिंदगी भी एक तरह से नक्शे को पढ़ने जैसी है। कुछ लोग नक्शा सही पढ़ लेते हैं और कुछ लोग गलत।

जिंदगी के लिए दिए तीन मंत्र

डोभाल ने बताया कि शेरपा ने उन्हें जिंदगी को लेकर तीन बातें कहीं थीं।

पहली- जानिए कि आप इस वक्त कहां हैं।

दूसरी- जानिए कि आपको कहां जाना है।

तीसरी- वहां पहुंचने का रास्ता जानिए।

डोभाल ने कहा कि पहाड़ों में रहने वाले उस शेरपा की यह बात उन्हें उस समय बहुत महत्वपूर्ण लगी। उन्होंने अपने अनुभव को छात्रों के सामने साझा करते हुए बताया कि मुश्किल दौर में भी यह समझना जरूरी है कि व्यक्ति की मौजूदा स्थिति क्या है, उसे किस दिशा में जाना है और उस लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता क्या है।

छात्रों से बोले डोभाल

आईआईटी रुड़की के दीक्षांत समारोह में डोभाल ने यह अनुभव छात्रों के साथ साझा किया। उनके संबोधन में उनके शुरुआती खुफिया करियर का यह प्रसंग खास तौर पर सामने आया, जिसमें एक कठिन पेशेवर परिस्थिति से निकलने और उससे सीख लेने की बात थी। उनके बताए ‘मैप रीडिंग’ के तीन सिद्धांत—कहां हैं, कहां जाना है और रास्ता क्या है— को उन्होंने जीवन की दिशा तय करने से जोड़कर पेश किया।

Piyush Kumar
पीयूष कुमारauthor

पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घटनाओं को सटीक, सरल और असरदार अंदाज में खबरों की भाषा देना उनकी सबसे बड़ी ताकत है। ब्रेकिंग न्यूज की रफ्तार हो या किसी जटिल मुद्दे को आसान बनाकर समझाने वाले एक्सप्लेनर—पीयूष दोनों में बराबर दक्षता रखते हैं। न्यूज जजमेंट, फैक्ट-बेस्ड राइटिंग और एंड-टू-एंड कॉपी प्रोडक्शन पर इनकी पकड़ मजबूत है और अबतक 4,000 से अधिक स्टोरी लिख चुके हैं।

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