देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध, खासकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए ठगी के तरीकों पर लगाम लगाने के लिए सीबीआई ने बड़ा कदम उठाया है। जांच एजेंसी सोमवार को एक AI-आधारित चैटबॉट ‘अभय’ लॉन्च करने जा रही है, जो लोगों को फर्जी नोटिस और साइबर ठगी से बचाने में मदद करेगा।
नई दिल्ली में आयोजित 22वें डी.पी. कोहली स्मारक व्याख्यान के मौके पर इस चैटबॉट का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। इस कार्यक्रम में जस्टिस सूर्यकांत भी मौजूद रहेंगे और ‘साइबर अपराध की चुनौतियां-पुलिस और न्यायपालिका की भूमिका’ विषय पर संबोधन देंगे।
ये है अभय को लाने का उद्देश्य
CBI के मुताबिक,‘अभय’ चैटबॉट का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को यह सुविधा देना है कि वे किसी भी संदिग्ध नोटिस की प्रामाणिकता तुरंत जांच सकें। हाल के महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें ठग खुद को CBI अधिकारी बताकर लोगों को फर्जी नोटिस भेजते हैं, उन्हें डराते हैं और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर करोड़ों रुपये की वसूली करते हैं। CBI का मानना है कि ‘अभय’ जैसे AI टूल के जरिए आम नागरिकों को सशक्त बनाया जा सकता है, ताकि वे ठगी के जाल में फंसने से पहले ही सतर्क हो जाएं। यह चैटबॉट न सिर्फ नोटिस की सच्चाई बताएगा, बल्कि लोगों को सही दिशा में मार्गदर्शन भी देगा।
क्या है 'डिजिटल अरेस्ट'
‘डिजिटल अरेस्ट’ दरअसल एक नया साइबर फ्रॉड मॉडल है, जिसमें अपराधी वीडियो कॉल, फर्जी दस्तावेज और सरकारी एजेंसियों के नाम का इस्तेमाल कर पीड़ित को मानसिक दबाव में लेते हैं। कई बार पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता है कि वह किसी गंभीर अपराध में फंस गया है और उसे तुरंत पैसे देकर “मामला सुलझाना” होगा। इसी डर और भ्रम का फायदा उठाकर ठग बड़ी रकम उड़ा लेते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी चिंता
इस बढ़ते खतरे पर सुप्रीम कोर्ट भी चिंता जता चुका है। शीर्ष अदालत के अनुसार, साइबर ठगी के मामलों में देशभर में करीब 54,000 करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है,जिसे अदालत ने “लूट या डकैती” जैसा गंभीर अपराध बताया था।
गौरतलब है कि डी.पी. कोहली स्मारक व्याख्यान CBI के संस्थापक निदेशक डीपी कोहली की याद में आयोजित किया जाता है। 1963 में CBI की स्थापना के समय कोहली इसके पहले निदेशक बने थे और उन्होंने एजेंसी की नींव को मजबूत किया।
