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त्रिपुरा में बीएसएफ की बड़ी कार्रवाई, सीमा पर 29 बांग्लादेशी नागरिकों को दबोचा; भारतीय दलाल भी गिरफ्तार

BSF apprehends 29 Bangladeshi Nationals: बीएसएफ त्रिपुरा ने सीमा पर बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए 29 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ लिया है। बीएसएफ जवानों ने अलग-अलग अभियानों में बांग्लादेशियों समेत भारतीय दलालों को भी दबोचा है। आपको सीमा सुरक्षा बल की इस कार्रवाई के बारे में पूरी डिटेल बताते हैं।

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बीएसएफ त्रिपुरा ने सीमा पर 29 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा।

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), त्रिपुरा ने 6 से 10 मार्च के बीच सीमा पर 29 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा, एक विज्ञप्ति में कहा गया है। त्रिपुरा फ्रंटियर के बीएसएफ जवानों ने अलग-अलग अभियानों में त्रिपुरा के विभिन्न स्थानों से 29 बांग्लादेशी नागरिकों और भारतीय दलालों सहित सात भारतीय नागरिकों को पकड़ा। विज्ञप्ति में बताया गया है कि पुलिस स्टेशन एयरपोर्ट के अंतर्गत लंकामुरा, पुलिस स्टेशन अमतली के अंतर्गत निश्चिंतपुर, पुलिस स्टेशन मोहनपुर के अंतर्गत हरनाखोला, जिला पश्चिम त्रिपुरा के अंतर्गत रेलवे स्टेशन अगरतला, जिला उत्तर त्रिपुरा के अंतर्गत रेलवे स्टेशन चुरईबारी और धर्मनगर, जिला दक्षिण त्रिपुरा के अंतर्गत पुलिस स्टेशन सबरूम और जिला गोमती के अंतर्गत एल के पारा में इन अभियानों को चलाया गया।

बीएसएफ त्रिपुरा ने सीमा पर 29 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा

6 मार्च से 10 मार्च के बीच में बीएसएफ ने त्रिपुरा में सीमा पर 29 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा। बीएसएफ बटालियनों ने स्थानीय आबादी की चिंताओं को दूर करने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में नौ से अधिक ग्राम समन्वय बैठकें आयोजित की हैं। विज्ञप्ति में कहा गया है कि बीएसएफ देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी निगरानी और खुफिया क्षमताओं को बढ़ाना जारी रखे हुए है। बीएसएफ त्रिपुरा ने अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तस्करी और सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी भी बढ़ा दी है।

भारी तादाद में मादक पदार्थ, मवेशी और अन्य प्रतिबंधित जब्त

मार्च 2025 के पहले सप्ताह में, बीएसएफ के जवानों ने तस्करी के कई प्रयासों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया और 2.88 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ, मवेशी, चावल और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की एक बड़ी मात्रा जब्त की और 280.67 किलोग्राम गांजा भी जब्त किया।

विज्ञप्ति में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तस्करी और अन्य अपराधों को रोकने और समकक्षों के साथ बेहतर समन्वय के लिए, बीएसएफ ने 61 एक साथ समन्वित गश्ती की है और विभिन्न स्तरों पर बीजीबी के साथ कई सीमा समन्वय बैठकें आयोजित की हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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