दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर आयोजित हस्तशिल्प बाजार में सदस्य और साझेदार देशों की विविध सांस्कृतिक विरासत देखने को मिल रही है। भारत मंडपम के पास स्थित राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी परिसर में लगाए गए इस बाजार में अलग-अलग देशों के कारीगर अपनी पारंपरिक कला और शिल्प का प्रदर्शन कर रहे हैं।
राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी परिसर में लगाए गए बाजार में ब्राजील की मिट्टी से कलाकृतियां बनाने की सदियों पुरानी परंपरा से लेकर बेलारूस की पारंपरिक विलो वीविंग तक आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। विलो वीविंग में पेड़ की लचीली और पतली टहनियों को बुनकर टोकरियां, फर्नीचर, सजावटी सामान और घरेलू उपयोग की दूसरी वस्तुएं तैयार की जाती हैं। यह बेलारूस की पुरानी लोक कलाओं में शामिल है।
ब्रिक्स-2026 की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, बाजार में सदस्य और साझेदार देशों के कारीगरों, डिजाइनरों और रचनात्मक उद्यमों के उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं। इनमें हस्तशिल्प, हथकरघा, वस्त्र, कलाकृतियां और अन्य पारंपरिक उत्पाद शामिल हैं। यह बाजार 10 सितंबर से 15 सितंबर तक चलेगा।
अलग-अलग देशों की खास कला
बेलारूस की ओर से मोलोडेचनो की प्रसिद्ध विलो वीविंग कलाकार लाना स्लास्त्सियोन ‘वर्बाच्का’ लोक शिल्प समूह का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। वहीं, ब्राजील की शिल्पकार और मूर्तिकार क्लेजियानिया रिबेरो डी लीमा पाइव मिट्टी के बर्तन और कलाकृतियां बनाने की अपनी कला प्रदर्शित कर रही हैं। ब्राजील की मृदा शिल्प परंपरा को अमेरिका की सबसे पुरानी जीवित कलात्मक परंपराओं में से एक बताया जाता है।कजाकिस्तान के कलाकार और आभूषण डिजाइनर सेरिक रिस्बेकोव पारंपरिक कजाख प्रभावों को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़कर अपनी कला पेश कर रहे हैं। वहीं, ईरान की कलाकार नादिया करीमी बलूची कढ़ाई की पारंपरिक कला को संरक्षित करने और उसे नए रूप में आगे बढ़ाने पर काम कर रही हैं।
ब्रिक्स सम्मेलन के साथ संस्कृति का संगम
भारत ने 1 जनवरी 2026 को ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली थी। इसी वर्ष ब्रिक्स की स्थापना के 20 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। ऐसे में शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित यह हस्तशिल्प बाजार केवल व्यापार और कूटनीति का मंच नहीं, बल्कि सदस्य और साझेदार देशों की लोक कला, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को करीब से जानने का अवसर भी दे रहा है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को हो रहा है। इसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा समेत कई देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं।
