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मराठा आरक्षण को लेकर मनोज जरांगे का बड़ा ऐलान, अब मुंबई में शुरू करेंगे आमरण अनशन; जानें क्या है प्लान

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे अब मुंबई स्थित आजाद मैदान पर आमरण अनशन शुरू करने का ऐलान किया है। हालांकि, अभी उन्हें सरकार की ओर से अनुमति नहीं दी गई है।

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मनोज जरांगे (फाइल फोटो-Twitter)

मराठा आरक्षण की मांग के लिए लगातार संघर्ष जारी है। आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन पर बैठे मनोज जरांगे पाटील ने सरकार पर दबाव बनाने का प्लान किया है। उन्होंने कहा है कि अब बात ऐसे नहीं बनने वाली, लिहाजा मुंबई कूच किया जाएगा। अब वे मुंबई में भूख हड़ताल पर बैठेंगे।

इन जिलों से होकर गुजरेंगे जरांगे

जालना के अंतरवाली सराटी में हुई बैठक में मनोज जरांगे पाटील ने मुंबई जाने और आजाद मैदान में आमरण अनशन शुरू करने की घोषणा की। जरांगे पाटील के मुताबिक, मुंबई कुच के दौरान चार जगहों पर रुकने के बाद पांचवें दिन आजाद मैदान पहुंचेंगे। पहला ठहराव पाटोदा, बीड जिले में, दूसरा श्रीगोंदा, अहिल्यानगर जिले में, तीसरा हडपसर, पुणे जिले में, चौथा रुकना खोपोली या कोपरखैरने और रायगढ़ जिले में होगा। यहां वे आरक्षण के समर्थन में आए लोगों से मुलाकात करेंगे और आगे की रणनीति साझा करेंगे।

आजाद मैदान में आमरण अनशन होगा शुरू

जानकारी के मुताबिक, पांचवें दिन सुबह 10 बजे से मुंबई के आजाद मैदान में आमरण अनशन शुरू किया जाएगा। आमरण अनशन के लिए सरकार से अनुमति मांगी गई है, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से अनुमति नहीं दी गई है। जरांगे को उम्मीद है कि सरकार उन्हें मंजूरी देगी। मराठा आरक्षण को लेकर मनोज जरांगे ने समर्थकों की बैठक बुलाई है। बैठक में आंदोलन को आगे कैसे बढ़ाया जाए, इसे लेकर रणनीति तैयार की गई है।

हालांकि, जरांगे पिछले 14 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। ऐसे में उनकी सेहत को लेकर भी समर्थकों और प्रशासन की नजर बनी हुई है। उनका कहना है कि इस बार कुनबी आरक्षण का सार्टिफिकेट लिए बिना मुंबई से वापस नहीं लौटेंगे।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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