18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की अपनी व्यस्त राजनयिक गतिविधियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ हैदराबाद हाउस में एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की। इस मुलाकात में भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के साथ-साथ रक्षा, ऊर्जा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने दोनों देशों के बीच मजबूत होते व्यापारिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों पर संतोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने जनवरी 2026 में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान की भारत यात्रा और मई 2026 में अपनी यूएई यात्रा का विशेष रूप से उल्लेख किया।
ओडिशा में बनेगा वैश्विक एल्युमीनियम हब
द्विपक्षीय वार्ता का सबसे बड़ा आकर्षण यूएई की इंटरनेशनल होल्डिंग कंपनी (IHC) द्वारा भारत में किए जाने वाले ऐतिहासिक निवेश की घोषणा रही।IHC ने ओडिशा में 11.5 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹96,000 करोड़) की लागत से एक विशाल एकीकृत ग्रीनफील्ड एल्युमीनियम परियोजना विकसित करने का ऐलान किया है। यह एल्युमीनियम क्षेत्र में भारत का अब तक का सबसे बड़ा एकीकृत निवेश है। इस मेगा प्रोजेक्ट से ओडिशा को वैश्विक एल्युमीनियम विनिर्माण के केंद्र के रूप में पहचान मिलेगी और हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
ब्रिक्स में UAE का योगदान
प्रधानमंत्री मोदी ने 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सक्रिय और रचनात्मक भागीदारी की सराहना की। दोनों नेताओं ने सहमति व्यक्त की कि ब्रिक्स मंच के माध्यम से साझा वैश्विक प्राथमिकताओं और हितों को आगे बढ़ाने के लिए दोनों देश मिलकर काम करते रहेंगे।
वार्ता में यूएई के नवीनतम संप्रभु निवेश कोष 'लइमाद' (L’Imad) की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई। माना जा रहा है कि यह नया फंड भारत-यूएई साझेदारी को आर्थिक और वित्तीय स्तर पर नए पंख देने में अहम भूमिका निभाएगा। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच रक्षा, अंतरिक्ष, नागरिक परमाणु ऊर्जा, तकनीक, नवाचारऔर उभरते प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग को गति देने पर भी गहन विचार-विमर्श हुआ।
