BR Ambedkar Jayanti 2026: हर साल 14 अप्रैल को भारत के संविधान निमार्ता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई जाती है। एक महान चिंतक, समाज सुधारक, कानून एक्सपर्ट, आर्थिक विशेषज्ञ, बहुभाषी वक्ता, संपादक और पत्रकार रहे बाबा साहब दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं।
भारतीय संविधान के शिल्पकार कहे जाने वाले बाबा साहेब ने सारा जीवन भारतीय समाज में व्यापत जाति व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष में बता दिया। उन्होंने भारतीय समाज में समानता लाने के काफी प्रयास किए। 14 अप्रैल 1891 में मध्यप्रदेश के महू में जन्मे बाबासाहेब कहा करते थे कि वह ऐसे धर्म को मानते हैं दो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है।
बाबा साहेब का परिवार महार जाति से ताल्लुक रखता था, जिसे अछूत माना जाता था। बचपन में अभाव और व्यापत भेदभाव के बावजूद उन्होंने जिंदगी में कभी निराशा और असफलता को अपनी परछाई से दूर रखा। कड़ी मेहनत और शिक्षा हासिल कर वो आजाद भारत के पहले कानून मंत्री बने। साल 1990 में उन्हें मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न भी दिया गया।

बाबा साहेब अंबडकर से जुड़ी बड़ी बातें। AI IMAGE
बाबा साहेब से जुड़ी बड़ी बातें
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के 'नंबर वन' छात्र
डॉ. अंबेडकर की शैक्षणिक योग्यता आज भी एक मिसाल है। कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क ने अपनी स्थापना के 250 साल पूरे होने पर 2004 में दुनिया के उन 100 श्रेष्ठ विद्वानों की सूची जारी की थी जिन्होंने वहां से शिक्षा प्राप्त की थी। डॉ. अंबेडकर इस सूची में पहले स्थान पर थे। उनके पास 64 विषयों में महारत थी और वे 9 भाषाओं के ज्ञाता थे।
आरबीआई (RBI) की स्थापना में मुख्य भूमिका
बहुत कम लोग जानते हैं कि 'भारतीय रिजर्व बैंक' (Reserve Bank of India) की नींव बाबासाहेब के विचारों पर टिकी है। हिल्टन यंग कमीशन (Royal Commission on Indian Currency and Finance) को उन्होंने जो सुझाव दिए थे, वे उनकी किताब 'The Problem of the Rupee: Its Origin and Its Solution' पर आधारित थे। इसी गाइडलाइन के आधार पर 1935 में आरबीआई का गठन हुआ।
भारत के पहले कानून मंत्री
आजाद भारत के पहले कानून मंत्री के रूप में उन्होंने 'हिंदू कोड बिल' पेश किया था। वे महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, तलाक के अधिकार और समान उत्तराधिकार दिलाने के पक्षधर थे। जब इस बिल को संसद में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला, तो उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जो उनके सिद्धांतों के प्रति अडिगता को दर्शाता है।
कामकाजी घंटों में ऐतिहासिक बदलाव
आज भारत में जो 8 घंटे की शिफ्ट का कानून है, वह बाबासाहेब की ही देन है। उनसे पहले भारत में मजदूरों को दिन में 12 से 14 घंटे काम करना पड़ता था। 1942 में दिल्ली में आयोजित 'इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस' के दौरान उन्होंने कामकाजी घंटों को घटाकर 8 घंटे करने का प्रस्ताव रखा और उसे लागू करवाया।
विदेश जाकर अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट करने वाले पहले भारतीय
डॉ. अंबेडकर ने न केवल लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से शिक्षा प्राप्त की, बल्कि वे विदेश से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट (Ph.D.) की डिग्री हासिल करने वाले पहले भारतीय थे। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी शोषितों के उत्थान और देश की आर्थिक मजबूती के लिए समर्पित कर दी।
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