World Plastic Surgery Day: हर साल 15 जुलाई को World Plastic Surgery Day मनाया जाता है। इस खास दिन हम ये संदेश देना चाहते हैं कि जलने जैसी दुर्घटनाओं में सही समय पर दी गई फर्स्ट एड गंभीर नुकसान को काफी हद तक कम कर सकती है। रसोई में गर्म तेल का छींटा पड़ना, चाय या गर्म पानी गिर जाना, गैस की लौ से हाथ जल जाना या आग की चपेट में आ जाना जैसी घटनाएं कभी भी हो सकती हैं। ऐसे समय में घबराहट में लोग अक्सर टूथपेस्ट, घी, मक्खन या बर्फ जैसे घरेलू नुस्खे अपना लेते हैं, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार जलने के बाद के पहले 30 मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। इसी दौरान उठाए गए सही कदम (Burn First Aid) यह तय करते हैं कि त्वचा को कितना नुकसान होगा, घाव कितनी जल्दी भरेगा और भविष्य में स्थायी निशान पड़ने का खतरा कितना रहेगा। इसको लेकर हमने बात की शारदाकेयर हेल्थसिटी के प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के वरिष्ठ सलाहकार, डॉ. तन्मय रॉय से...
उनके मुताबिक जलने के बाद सबसे पहला काम मरीज को आग, गर्मी, बिजली या किसी भी खतरनाक स्रोत से दूर सुरक्षित स्थान पर ले जाना है। इसके बाद जले हुए हिस्से को कम से कम 20 मिनट तक सामान्य या हल्के ठंडे (15–25 डिग्री सेल्सियस) बहते पानी के नीचे रखना चाहिए। इससे त्वचा का तापमान धीरे-धीरे कम होता है और जलन अंदर तक फैलने से रोकी जा सकती है। इस दौरान बर्फ या अत्यधिक ठंडे पानी का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे क्षतिग्रस्त त्वचा को अतिरिक्त नुकसान पहुंच सकता है।
यदि जले हुए हिस्से पर अंगूठी, घड़ी, कड़ा या तंग कपड़े हों तो सूजन बढ़ने से पहले उन्हें सावधानीपूर्वक हटा देना चाहिए। इसके बाद घाव को साफ, सूखी और नॉन-स्टिक ड्रेसिंग या स्टेराइल कपड़े से ढक दें, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके। अगर कपड़े त्वचा से चिपक गए हों तो उन्हें जबरदस्ती खींचने की कोशिश न करें, बल्कि तुरंत अस्पताल पहुंचें।
पहले समझें जलने की गंभीरता
| बर्न का प्रकार | लक्षण | क्या करना चाहिए? |
|---|---|---|
| First-Degree Burn | त्वचा लाल होना, हल्की सूजन और दर्द | 20 मिनट तक ठंडे बहते पानी से धोएं और निगरानी रखें |
| Second-Degree Burn | फफोले पड़ना, तेज दर्द | पानी से ठंडा करें, फफोले न फोड़ें और डॉक्टर को दिखाएं |
| Third-Degree Burn | त्वचा सफेद, काली या चमड़े जैसी दिखे, दर्द कम महसूस हो | यह मेडिकल इमरजेंसी है, तुरंत अस्पताल जाएं |
ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी
डॉ. तन्मय रॉय बताते हैं कि ज्यादातर लोग जलने के बाद घरेलू नुस्खों पर भरोसा करते हैं, जबकि यही सबसे बड़ी भूल होती है। टूथपेस्ट, घी, मक्खन, तेल, हल्दी, आटा या कॉफी पाउडर जैसी चीजें घाव को भरने में मदद नहीं करतीं, बल्कि संक्रमण का खतरा बढ़ा सकती हैं। इसी तरह फफोलों को फोड़ना भी सही नहीं है, क्योंकि वे त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत होते हैं। बर्फ लगाने से भी बचना चाहिए, क्योंकि अत्यधिक ठंडक रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकती है और त्वचा की रिकवरी धीमी पड़ सकती है।
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केमिकल से जलने पर अलग है उपचार
रासायनिक (केमिकल) जलन के मामलों में अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है। यदि एसिड, क्षार या किसी अन्य रसायन के कारण त्वचा जली हो तो प्रभावित हिस्से को तुरंत लंबे समय तक बहते पानी से धोना चाहिए। हालांकि यदि त्वचा पर ड्राई लाइम (Quicklime) जैसा सूखा रसायन लगा हो तो पहले उसे सावधानी से हटाना चाहिए, उसके बाद पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। ऐसे मामलों में जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचना सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।
कई बार जलन ऊपर से मामूली दिखाई देती है, लेकिन अंदरूनी नुकसान काफी गंभीर होता है। खासकर यदि आग किसी बंद कमरे में लगी हो और मरीज ने धुआं अंदर लिया हो, तो फेफड़ों को गंभीर क्षति पहुंच सकती है। ऐसे मरीजों को सांस लेने में दिक्कत कुछ घंटों बाद भी शुरू हो सकती है। इसलिए ऐसी परिस्थितियों में अस्पताल जाकर जांच कराना बेहद जरूरी है।
ऐसी कंडीशन में बिल्कुल भी देर न करें
- चेहरा, हाथ, पैर, जोड़ों या जननांग जल गए हों।
- जलन शरीर के बड़े हिस्से में फैली हो।
- बिजली, रसायन या धुएं के कारण जलन हुई हो।
- सांस लेने में परेशानी, तेज दर्द या गहरे घाव हों।
- मरीज बच्चा, बुजुर्ग या गर्भवती महिला हो।
कब पड़ती है स्किन ग्राफ्टिंग की जरूरत
डॉ. तन्मय रॉय के अनुसार, गंभीर जलन की स्थिति में कई बार स्किन ग्राफ्टिंग की जरूरत भी पड़ सकती है। यह प्रक्रिया तब की जाती है जब त्वचा की गहरी परतें पूरी तरह नष्ट हो जाती हैं और घाव अपने आप भरने की संभावना नहीं रहती। इस तकनीक में शरीर के किसी स्वस्थ हिस्से से त्वचा लेकर जले हुए स्थान पर लगाई जाती है, जिससे घाव जल्दी भरता है, संक्रमण का खतरा कम होता है और स्थायी निशान पड़ने की संभावना भी घट जाती है।
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बच्चों के लिए बन सकती है बड़ा खतरा
बच्चों में बर्न इंजरी और भी गंभीर मानी जाती है, क्योंकि उनकी त्वचा बड़ों की तुलना में अधिक पतली और संवेदनशील होती है। गर्म दूध, चाय या पानी के मामूली संपर्क से भी गहरी जलन हो सकती है। इसलिए घर में गर्म तरल पदार्थ हमेशा बच्चों की पहुंच से दूर रखें, खाना बनाते समय बर्तनों के हैंडल अंदर की ओर रखें और छोटे बच्चों को रसोई में कभी भी अकेला न छोड़ें।
रिकवरी में इन बातों का ध्यान रखें
घाव भरने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर ड्रेसिंग बदलवानी चाहिए। शरीर को पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन और पानी मिलना भी जरूरी है, क्योंकि इससे नई त्वचा बनने में मदद मिलती है। यदि घाव में लालिमा बढ़ने लगे, पस आने लगे, बदबू आए, बुखार हो या दर्द लगातार बढ़ता जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। घाव भरने के बाद नई त्वचा को कुछ समय तक सीधी धूप से बचाना भी जरूरी होता है, ताकि त्वचा का रंग बदलने और स्थायी निशान बनने का खतरा कम हो सके।
डॉ. तन्मय रॉय कहते हैं कि जलने के बाद के पहले 30 मिनट किसी भी मरीज की रिकवरी के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। सही समय पर वैज्ञानिक तरीके से दी गई फर्स्ट एड न केवल त्वचा को गंभीर नुकसान से बचाती है, बल्कि संक्रमण, सर्जरी की जरूरत और लंबे समय तक रहने वाले निशानों के खतरे को भी काफी हद तक कम कर सकती है। इसलिए जलने की स्थिति में घरेलू नुस्खों के बजाय सही प्राथमिक उपचार अपनाएं और जरूरत पड़ने पर बिना देरी किए विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें।
