देश

INS ब्रह्मपुत्र के लापता नाविक का शव बरामद, दो दिन पहले अग्निकांड के बाद एक ओर झुक गया था युद्धपोत

INS Brahmaputra: INS ब्रह्मपुत्र में आग लगने के बाद एक नाविक लापता हो गया था, जिसके लिए बीते दिनों से खोजी अभियान चलाया जा रहा था। आज (बुधवार) गहन गोताखोरी अभियान के बाद लीडिंग सीमैन सीतेंद्र सिंह का शव बरामद किया गया है।

Image

आईएनएस ब्रह्मपुत्र।

Photo : ANI

INS Brahmaputra: भारतीय नौसेना के बहुउद्देशीय वॉरशिप INS ब्रह्मपुत्र को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। 21 जुलाई को हुए अग्निकांड के बाद से लापता नाविक का शव बरामद हुआ है। नौसेना ने बताया कि आज (बुधवार) गहन गोताखोरी अभियान के बाद लीडिंग सीमैन सीतेंद्र सिंह का शव बरामद किया गया है।

नौसेना ने कहा, नौसेना चीफ एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और भारतीय नौसेना के सभी कर्मचारी सीतेंद्र सिंह के परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। भारतीय नौसेना इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिवार के साथ खड़ी है। बता दें, INS ब्रह्मपुत्र में आग लगने के बाद एक नाविक लापता हो गया था, जिसके लिए बीते दिनों से खोजी अभियान चलाया जा रहा था।

नौसेना चीफ ने किया दौरान

नौसेना डॉकयार्ड मुंबई में आईएनएस ब्रह्मपुत्र की घटना के बाद नौसेना प्रमुख एडमिरल 23 जुलाई 24 को मुंबई का दौरा किया। उन्होंने दुर्घटना के लिए जिम्मेदार घटनाओं के अनुक्रम और लापता नाविक का पता लगाने के लिए किए गए प्रयासों की समीक्षा की। नौसेना ने बताया, इस दौरान एडमिरल त्रिपाठी को INS ब्रह्मपुत्र में हुए नुकसान और मरम्मत योजना के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने निर्देश दिया कि आईएनएस ब्रह्मपुत्र को समुद्र में चलने लायक और युद्ध के लिए तैयार करने के लिए कमान और नौसेना मुख्यालय द्वारा सभी कार्रवाई तुरंत शुरू की जानी चाहिए।

एक ओर झुकता जा रहा था युद्धपोत

बता दें, आईएनएस ब्रह्मपुत्र में 21 जुलाई की शाम आग लग गई थी। यह घटना तब हुई जब नौसेना के मुंबई स्थित पोतगाह में उसकी मरम्मत की जा रही थी। आग पर 22 जुलाई सुबह तक आग पर काबू पा लिया था। हालांकि, आग की घटना के बाद युद्धपोत एक ओर (बंदरगाह की ओर) झुक गया और तमाम कोशिशों के बाद भी उसे सीधा नहीं किया जा सका था। INS की घटना के बारे में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जानकारी ली थी।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article