4 फरवरी को लोकसभा में हंगामा करने वाली विपक्षी महिला सांसदों के खिलाफ अब भारतीय जनता पार्टी की महिला सांसदों ने मोर्चा खोल दिया है। भाजपा की महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से विपक्षी सांसदों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है, जिन्होंने सत्ता पक्ष की बेंचों में घुसकर, मेज पर चढ़कर और प्रधानमंत्री की कुर्सी का घेराव किया था। भाजपा की महिला सांसदों ने यह भी कहा कि 4 फरवरी को लोकसभा परिसर में हुई घटनाओं ने सभी को बेहद चिंतित कर दिया है, क्योंकि इस स्थिति के गंभीर और अप्रिय नतीजे हो सकते थे और यह भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में सबसे काले पलों में से एक साबित हो सकता था।
4 फरवरी को जमकर हुआ था हंगामा
4 फरवरी को विपक्षी विरोध प्रदर्शनों के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई बहस का जवाब नहीं दे सके।
अपने पत्र में भाजपा की महिला सांसदों ने कहा कि वे राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान 4 फरवरी को लोकसभा अध्यक्ष द्वारा सदन की गरिमा, मर्यादा और पवित्रता को बनाए रखने और उसकी रक्षा करने के अनुकरणीय तरीके के लिए अपनी गहरी कृतज्ञता और प्रशंसा व्यक्त करना चाहती हैं। पत्र में कहा गया है कि उस दिन, पूरे सदन और पूरे देश ने लोकसभा कक्ष के भीतर एक अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक घटना देखी।
सांसदों ने पत्र में क्या-क्या कहा
सांसदों ने पत्र में कहा- हमने देखा कि विपक्षी दलों के सदस्य न केवल सदन के वेल में घुस आए, बल्कि वे मेज पर चढ़ गए, कागज फाड़ दिए और उन्हें अध्यक्ष की ओर फेंक दिया। इसके अलावा, दुख की बात यह है कि कुछ महिला माननीय सदस्य आक्रामक रवैया अपनाते हुए और हाथों में बैनर व पोस्टर लिए दूसरी तरफ चली गईं। उन्होंने न केवल माननीय प्रधानमंत्री की सीट को घेर लिया, बल्कि वरिष्ठ मंत्रियों की सीट तक भी पहुंच गईं।
सांसदों ने कहा कि इस गंभीर उकसावे से बेहद उत्तेजित और क्रोधित होने के बावजूद, सत्ताधारी दल के सदस्यों ने वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर पूर्ण संयम बरता और किसी भी तरह की जवाबी कार्रवाई नहीं की। अगर हमने संयम नहीं बरता होता, तो एक भयावह स्थिति उत्पन्न हो सकती थी। स्थिति को और भी गंभीर बनाते हुए बाद में हमने देखा कि विपक्षी सांसद आक्रामक रूप से आपके चैंबर की ओर बढ़ गए। हमें आपके सदन के भीतर से तेज आवाजें सुनाई दे रही थीं।
भाजपा की महिला सांसदों ने कहा, इसलिए हम आपसे आग्रह करते हैं कि सदन परिसर में इस तरह के जघन्य कृत्य करने वाले और हमारे लोकतांत्रिक संस्थानों को कलंकित करने वाले विपक्षी सांसदों के खिलाफ नियमों के तहत कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें।
ओम बिरला पर जताया भरोसा
उन्होंने यह भी कहा कि सदन के पीठासीन अधिकारी के रूप में ओम बिरला के लगभग सात वर्षों के कार्यकाल के दौरान, उन्होंने सदन की प्रतिष्ठा और प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। सांसदों ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष के रूप में उन्होंने हमेशा निष्पक्षता का प्रदर्शन किया है और दलीय संबद्धता की परवाह किए बिना सभी सदस्यों को समान अवसर प्रदान किए हैं। इसलिए, हम आपके नेतृत्व में पूर्ण विश्वास रखते हैं और महसूस करते हैं कि लोकसभा आपके जैसे अध्यक्ष को पाकर भाग्यशाली है।
2 फरवरी से लोकसभा में हंगामा देखा जा रहा है। शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी को स्पीकर ने पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण के अंशों पर आधारित एक लेख से जिक्र करने से देने से रोक दिया था, जिसमें 2020 के भारत-चीन संघर्ष का जिक्र है। 4 फरवरी को विपक्ष के विरोध के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस का जवाब नहीं दे सके। एक अभूतपूर्व कदम के तहत, 5 फरवरी को प्रधानमंत्री के पारंपरिक भाषण के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया। अध्यक्ष ने राष्ट्रपति के संबोधन के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पढ़ा और विपक्षी सदस्यों के नारेबाजी के बीच ध्वनि मत से इसे पारित कर दिया गया।
