सीनियर भाजपा नेता ज्ञानदेव आहूजा (Gyandev Ahuja) ने शनिवार को विवाद खड़ा कर दिया, जब उन्होंने वायनाड में भूस्खलन को केरल में गोहत्या की प्रथा (cow slaughter in kerala) से जोड़ा। राजस्थान के पूर्व विधायक ने दावा किया कि जहां भी गोहत्या होती है, वहां ऐसी घटनाएं होती रहेंगी। गौर हो कि 30 जुलाई को, मुंडाकाई, चूरलमाला और मेप्पाडी सहित वायनाड के कई गांवों में भूस्खलन हुआ।
राज्य सरकार के नवीनतम अपडेट के अनुसार, केरल के वायनाड भूस्खलन में मरने वालों की संख्या शनिवार को 358 तक पहुंच गई, बचाव दल मलबे के नीचे और ढह गए घरों में फंसे बचे लोगों की तलाश के लिए गहरे खोज रडार का इस्तेमाल कर रहे हैं।
मीडिया से बात करते हुए, आहूजा ने जोर देकर कहा कि वायनाड में भूस्खलन गोहत्या का सीधा परिणाम है, उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक केरल में यह प्रथा बंद नहीं की जाती, तब तक इसी तरह की त्रासदियां जारी रहेंगी। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे क्षेत्रों में बादल फटने और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाएँ अक्सर होती रहती हैं, लेकिन वे इस परिमाण की आपदाओं का कारण नहीं बनती हैं।
आहूजा ने कहा, '2018 से हमने एक पैटर्न देखा है, जहां गोहत्या में शामिल क्षेत्रों में ऐसी दुखद घटनाएं होती हैं।' 'अगर गोहत्या बंद नहीं हुई, तो केरल में इसी तरह की त्रासदियां होती रहेंगी।'
मलबे के नीचे जीवित बचे लोगों की तलाश
गौर हो कि 1,300 से ज़्यादा बचावकर्मी भारी मशीनरी और अत्याधुनिक उपकरणों के साथ नष्ट हो चुकी इमारतों और मलबे के नीचे जीवित बचे लोगों की तलाश कर रहे हैं।
