केरल के वायनाड में आए जानलेनवा विनाशकारी भूस्खलन में अभी तक 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है वहीं भारी तादात में लोग अभी भी मिसिंग हैं, इस बीच केरल वन विभाग के अधिकारियों ने एक साहसिक बचाव अभियान के तहत भूस्खलन और खराब मौसम की स्थिति के बावजूद जंगल और मलबों में फंसे बच्चों और परिवारों को सफलतापूर्वक निकाला। वायनाड के पनिया समुदाय का यह परिवार एक पहाड़ी की चोटी पर एक गुफा में फंसा हुआ था वन विभाग की टीम को वहां पहुंचने में करीब चार घंटे से अधिक का समय लगा, भारी बारिश सहित प्रतिकूल मौसम की स्थिति ने बचाव अभियान की जटिलता को बढ़ा दिया था पर टीम फिर भी इन बच्चों को सुरक्षित बचा लाई।
कलपेट्टा रेंज अधिकारी आशिक के नेतृत्व में एक टीम ने वीरतापूर्वक एक परिवार को बचाया, जिसमें बच्चे भी शामिल थे, जो वायनाड के अट्टामाला के निकट भोजन और पानी के बिना फंसे हुए थे।
टीम ने फंसे हुए परिवारों तक पहुँचने के लिए रस्सियों का उपयोग करते हुए ऊबड़-खाबड़ इलाके में लगभग चार घंटे बिताए, बच्चों को खड़ी और फिसलन भरी पहाड़ियों से सावधानीपूर्वक सुरक्षित वापस ले आए।
भारी बारिश सहित प्रतिकूल मौसम की स्थिति ने बचाव अभियान की जटिलता को और बढ़ा दिया। लेकिन तमाम चुनौतियों के बावजूद ये संभव कर दिखाया। बच्चों का यूं सुरक्षित निकलना किसी चमत्कार से कम नहीं। बच्चें काफी डरे और सहमे हुए हैं उनके लिए ये दिन किसी ट्रॉमा से कम नहीं थे।
बताते हैं कि पनिया समुदाय के लोग आम तौर पर वन उत्पादों पर आश्रित हैं और उन्हें स्थानीय बाजार में बेचकर चावल खरीदकर उससे अपना पेट भरते हैं पर वहां भूस्खलन और भारी बारिश के कारण वो काफी समय से कुछ खा नहीं पाए थे।
इस रेस्क्यू अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए केरल के सीएम पिनाराई विजयन ने कहा, 'वन अधिकारियों का ये जज्बा हमें याद दिलाता है कि संकट की घोर घड़ी में भी केरल की जीवटता चमकती रहती है और हम एकजुट होकर पुनर्निर्माण करेंगे तथा और मजबूत होकर उभरेंगे'