BJP Hits Back at Congress on Mock Parliament: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के महाभियोग प्रस्ताव वाले प्रतीकात्मक कार्यक्रम को लेकर सियासत गरमा गई है। शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर इंडिया ब्लॉक ने 'मॉक संसद' बुलाई, जिस पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया है। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस पर वोट चोरी का इतिहास याद दिलाते हुए बड़ा हमला बोला।
संबित पात्रा ने कहा, "आज वोट चोरी के आरोपों पर खरगे जी बोल रहे थे, तो मैं खरगे जी को कहना चाहता हूं कि हां, वोट चोरी में सच्चाई है। वोट चोरी हुई थी। आज 31 अक्टूबर है, सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती है। और अगर भारत में कभी वोट चोरी हुई तो वह गांधी परिवार के पहले सदस्य पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी। उन्होंने प्रमुख कांग्रेस नेताओं के वोट चुराए थे। उन नेताओं ने सरदार वल्लभभाई पटेल को प्रधानमंत्री चुनने के लिए मतपेटी में वोट डाले थे। उन वोटों को चुराकर पंडित जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री बने, एक अनिर्वाचित प्रधानमंत्री।"
खरगे के घर बुलाई गई थी मॉक संसद
दरअसल, इंडिया गठबंधन ने शनिवार को खरगे के आवास पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग पर चर्चा के लिए प्रतीकात्मक संसद सत्र बुलाया था। इस कार्यवाही की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। उन्होंने कहा कि यह सभा इसलिए बुलाई गई है ताकि मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू की जा सके। मीरा कुमार ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में मतदाता सूची से अनुचित तरीके से नाम काटे जा रहे हैं और जब इंडिया ब्लॉक पारदर्शिता का सवाल उठाता है तो कोई जवाबदेही नहीं दिखती। इस मॉक संसद में सिविल सोसाइटी के सदस्य और वे नागरिक भी मौजूद थे, जिनका नाम वोटर लिस्ट से काटे जाने का दावा किया जा रहा है।
इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने CEC के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया। खरगे ने कहा कि संविधान के आर्टिकल 326 के तहत मिला वोट का अधिकार आज खतरे में है। उन्होंने सरदार पटेल की 151वीं जयंती और इंदिरा गांधी के शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वोट का अधिकार आम आदमी की सबसे बड़ी ताकत है, इसी से सरकार बनती और हटती है।
CEC पर विपक्ष के 6 बड़े आरोप
विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार पर 6 आरोप लगाए हैं। जिसमें चुनावों में धांधली की साजिश रचना, 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाना, संसद की मंजूरी के बिना फॉर्म-6 में बदलाव, ECINET के जरिए वोटर लिस्ट पर कब्जा, दो अन्य चुनाव आयुक्तों को फैसलों से बाहर रखना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर काम करना शामिल हैं। विपक्ष के इस कार्यक्रम के बाद भाजपा ने इसे चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को बदनाम करने की साजिश बताया है।
