UP BJP: यूपी बीजेपी (UP BJP) में सह प्रभारियों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा कर दिया गया है। अनंत ओझा को वेस्ट यूपी पर फोकस की जिम्मेदारी दी गई है, साथ ही बीजेपी मुख्यालय में चुनाव प्रबंधन भी देखेंगे। डॉ. प्रदीप वर्मा को अवध और कानपुर क्षेत्र का जिम्मा मिला है। वहीं, जगदीश पटेल काशी क्षेत्र की जिम्मेदारी संभालेंगे। मेधा कुलकर्णी प्रदेश प्रभारी के साथ समन्वय के अलावा महिला संपर्क अभियान पर फोकस करेंगी।
क्या है बीजेपी की रणनीति?
देश के किसी भी अन्य राज्य के मुकाबले यूपी में सबसे ज्यादा प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए जाना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पार्टी नेतृत्व इस चुनाव को लेकर कितना गंभीर है। बीजेपी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने चार अलग-अलग राज्यों से आने वाले अनुभवी नेताओं को सह-प्रभारी बनाया है, जिन्हें यूपी के क्षेत्रों और विशिष्ट अभियानों का काम बांटा गया है।
अनंत ओझा (झारखंड)
जिम्मेदारी: पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्र और भाजपा प्रदेश मुख्यालय में चुनाव प्रबंधन
भूमिका: दो बार के विधायक ओझा युवा नेटवर्क और बूथ-स्तरीय समन्वय में विशेषज्ञ माने जाते हैं।
डॉ. प्रदीप वर्मा (झारखंड)
जिम्मेदारी: अवध क्षेत्र और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र
भूमिका: राज्यसभा सांसद प्रदीप वर्मा को सांगठनिक अनुशासन और जमीनी मोर्चेबंदी का जिम्मा सौंपा गया है।
जगदीश ईश्वरभाई पटेल (गुजरात)
जिम्मेदारी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी क्षेत्र और पूर्वांचल से जुड़ाव।
भूमिका: गुजरात मॉडल के कैडर प्रबंधन, बूथ मैनेजमेंट और पन्ना प्रमुख नेटवर्क को जमीनी स्तर पर लागू करना।
डॉ. मेधा कुलकर्णी (महाराष्ट्र)
जिम्मेदारी: महिला संपर्क अभियान तथा प्रभारी विनोद तावड़े के साथ मुख्य समन्वय कार्य।
भूमिका: आधी आबादी (महिला मतदाताओं) को पार्टी से जोड़ने और प्रबुद्ध वर्ग के बीच सांगठनिक पकड़ मजबूत करने की जिम्मेदारी।
क्यों अहम है बीजेपी के लिए यूपी और यह नई रणनीति?
उत्तर प्रदेश को बीजेपी ने 6 सांगठनिक क्षेत्रों (पश्चिम, ब्रज, कानपुर-बुंदेलखंड, अवध, काशी और गोरखपुर) में बांटा हुआ है। चार सह-प्रभारियों की तैनाती से यह तय किया गया है कि केंद्रीय प्रभारी विनोद तावड़े शीर्ष नीतिगत फैसलों पर नजर रखेंगे, जबकि चारों सह-प्रभारी 100-100 विधानसभा सीटों की कमान संभालकर सीधे जिला अध्यक्षों, मंडल अध्यक्षों, पन्ना प्रमुखों और बूथ कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करेंगे।
सोशल इंजीनियरिंग और जातीय समीकरण
पार्टी ने प्रभारी और सह-प्रभारियों की टीम में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), सवर्ण और महिला नेतृत्व का सटीक संतुलन बनाया है। इस टीम के जरिए पार्टी का लक्ष्य पिछड़ों, सवर्णों और महिला मतदाताओं के बीच पकड़ को अभेद्य बनाना है।
कार्यकर्ताओं के साथ सीधा तालमेल
पार्टी आलाकमान ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी प्रभारी और सह-प्रभारी लखनऊ में बैठकर रणनीति बनाने के बजाय जिलों और बूथों के दौरों पर रहेंगे। वे स्थानीय कार्यकर्ताओं, विभिन्न मोर्चों (युवा, महिला, किसान, ओबीसी, एससी) और प्रदेश पदाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर जमीनी नाराजगी या असंतोष को समय रहते दूर करेंगे।
2027 चुनाव का रोडमैप
बीजेपी का मानना है कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर ही गुजरता है, ऐसे में 2027 में लगातार तीसरी बार राज्य में बीजेपी सरकार की वापसी 2029 के राष्ट्रीय समीकरणों के लिए बेहद निर्णायक होगी। पार्टी अपने पूरे तंत्र को पूरी तरह से चुनावी मोड में ला चुकी है।
