Bihar Cabinet: बिहार में आज कैबिनेट विस्तार हुआ, कई नए चेहरे मंत्री बने तो कई पुराने बरकरार रहे। 32 मंत्रियों में से एक नाम ऐसा है, जो न तो विधायक है और न ही एमएलसी, लेकिन पिछली बार भी वो मंत्री थे और इस बार भी वो मंत्री हैं, नाम है दीपक प्रकाश (Deepak Prakash)। दीपक प्रकाश, उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं, जो राष्ट्रीय लोकमोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और राज्यसभा सांसद भी। पहली बार जब दीपक प्रकाश, नीतीश सरकार में मंत्री बने थे, तो खूब आलोचना हुई थी। नीतीश गए तो लगा कि दीपक प्रकाश चुनाव जीतने के बाद अब मंत्री बनेंगे, लेकिन सम्राट सरकार में भी उनकी मंत्री की कुर्सी बरकरार रही है। नीतीश कुमार के बेटेनिशांत कुमार (Nishant Kumar) भी इसी लिस्ट में हैं, वो भी किसी सदन के सदस्य नहीं हैं, लेकिन मंत्री बने हैं। हालांकि वो दीपक प्रकाश से एक कदम पीछे हैं। दीपक यह कारनामा लगातार दो बार कर चुके हैं, तो निशांत पहली बार।
दीपक प्रकाश का अनोखा रिकॉर्ड
दीपक प्रकाश संभवत: बिहार के एक ऐसे मंत्री हैं, जो किसी भी सदन का सदस्य नहीं होने के बाद भी लगातार दूसरी बार मंत्री बने हैं। इससे पहले भी इनके नाम एक अनोखा रिकॉर्ड था। पहली बार जब ये मंत्री बने तब भी ये किसी सदन के सदस्य नहीं थे और इससे पहले कि वो किसी सदन के सदस्य बनते, सरकार ही चली गई।
बिना सदन के मंत्री बन सकता है कोई?
इसका जवाब है-हां। मंत्री क्या सीएम, पीएम भी कोई बन सकता है, लेकिन शर्त है कि उसे छह महीने के भीतर संबंधित सदन का सदस्य होना होगा। जैसे दीपक प्रकाश के केस में इन्हें, या तो छह महीने के अंदर विधायक बनना होगा या फिर एमएलसी, तभी ये मंत्री बने रहे सकते हैं। खबर है कि उपचुनाव में एमएलसी की जो सीट खाली हुई है, उसपर दीपक प्रकाश चुने जा सकते हैं। उपेंद्र कुशवाहा अपने बेटे को एमएलसी बनाने के लिए बीजेपी पर दवाब बना रहे हैं, लेकिन अभी यह फाइनल नहीं हुआ है। उपेंद्र कुशवाहा पर पार्टी के विलय का दवाब भी है।
कुशवाहा पर परिवारवाद का आरोप
उपेंद्र कुशवाहा पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप भी लग रहा है। उपेंद्र कुशवाहा खुद तो राज्यसभा सांसद हैं ही, बेटे को मंत्री बना ही दिया है, पत्नी स्नेहलता कुशवाहा भी विधायक हैं। मतलब एक ही परिवार में तीन-तीन पद।
