कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और नरेंद्र मोदी सरकार पर अपना हमला और तेज कर दिया, जब एक नई रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल की स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) प्रक्रिया को संभालने के तरीके पर सवाल उठाए गए। जयराम रमेश ने चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार पर तब हमला बोला, जब एक रिपोर्ट में कहा गया कि बंगाल ट्रिब्यूनल के जजों ने EC के SIR पोर्टल में कमियों की ओर इशारा किया है। ये टिप्पणियां INDIA ब्लॉक के विरोध-प्रदर्शन से पहले और सुप्रीम कोर्ट द्वारा SIR प्रक्रिया की जांच के बीच आई हैं।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि पश्चिम बंगाल के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ट्रिब्यूनल में काम करने वाले एक दर्जन से ज़्यादा जजों ने चुनाव आयोग के डिजिटल पोर्टल में गंभीर समस्याओं की ओर इशारा किया था। उन्होंने कहा कि इस पोर्टल की वजह से वे ज़रूरी काम नहीं कर पा रहे थे, जैसे नोटिस भेजना, सुनवाई करना और उन वोटरों के नाम वोटर लिस्ट में वापस जोड़ना जिनके नाम हटा दिए गए थे।
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'इलेक्शन ओमिशन ऑफ़ इंडिया': EC पर जयराम रमेश का तीखा हमला
X पर एक तीखी पोस्ट में रमेश ने लिखा: 'इलेक्शन ओमिशन ऑफ इंडिया (चुनाव आयोग) की पोल खुलती जा रही है। साफ है कि PM-HM की रणनीति किसी भी कीमत पर पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने और उस पर कब्जा करने की थी। यह बड़े पैमाने पर हेरफेर और धांधली का एक क्लासिक मामला था, जिसकी देखरेख CEC ने की थी।' CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को दोहराते हुए, रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर इस विवाद के लिए राजनीतिक रूप से जिम्मेदार होने का आरोप लगाया।
'दो कठपुतली नचाने वालों को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए'
उन्होंने लिखा, 'कठपुतली को तो जाना ही है, लेकिन दो कठपुतली नचाने वालों को भी जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उनकी असलियत सबके सामने आ चुकी है और अब उनके हिसाब-किताब का समय दूर नहीं है।'ये टिप्पणियां INDIA ब्लॉक के तहत विपक्षी सांसदों द्वारा कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च करने की योजना से कुछ घंटे पहले आईं।
ट्रिब्यूनल के जजों ने बंगाल EC पोर्टल में कमियों की ओर इशारा किया
'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में कहा गया है कि बंगाल के SIR ट्रिब्यूनल के जजों ने बार-बार EC पोर्टल में कमियों की ओर इशारा किया। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिस्टम ट्रिब्यूनल को ठीक से नोटिस भेजने, वर्चुअल सुनवाई करने, अतिरिक्त दस्तावेज अपलोड करने या हटाए गए वोटरों का नाम वापस जोड़ने की इजाजत नहीं देता, भले ही ऐसा करने का निर्देश दिया गया हो। बताया जा रहा है कि ये चिंताएं चुनाव आयोग और कलकत्ता हाई कोर्ट, दोनों के सामने रखी गई थीं।
रिपोर्ट पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे बड़े विवाद के बीच सामने आई
यह रिपोर्ट पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे बड़े विवाद के बीच आई है। सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग की जानकारी के अनुसार, रिविजन प्रक्रिया के दौरान राज्य की वोटर लिस्ट से 27 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम हटा दिए गए थे, जिसके बाद नाम वापस जोड़ने के लिए 22 लाख से ज्यादा अपीलें आईं। ये नए आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब चुनाव आयोग पहले से ही तीन सदस्यों वाली इस संस्था के भीतर आपसी मतभेदों की खबरों को लेकर जांच के दायरे में है।
