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सत्ता के शिखर पर Suvendu Adhikari, 13 साल में गंवाए कई करीबी; ये रहे एक-एक नाम

पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री बनने जा रहे सुवेंदु अधिकारी का राजनीतिक सफर सिर्फ जीत की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, विश्वासघात और करीबी सहयोगियों को खोने वाले दर्दनाक दौर से भी गुजरा।

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कल पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे सुवेंदु अधिकारी

भाजपा ने अपने वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) को पश्चिम बंगाल का नया मुख्यमंत्री घोषत कर दिया है। हाल में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए राज्य की कुल 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि एक सीट पर अभी चुनाव होना बाकी है। सुवेंदु अधिकारी कल यानी शनिवार 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। एक लंबे संघर्ष के बाद आज वह पश्चिम बंगाल में सत्ता के शिखर पर हैं। लेकिन यह सफर उनके लिए कुछ ज्यादा ही लंबा रहा। क्योंकि इस सफर के दौरान उन्होंने एक-एक कर अपने कई सहयोगियों को खो दिया। जिनमें में से तीन तो उनके बहुत करीबी थे और एक चंद्रनाथ रथ (Chandranath Rath) की तो विधानसभा चुनाव 2026 में भाजपा की जीत के बाद हत्या कर दी गई। चलिए जानते हैं सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री की कुर्सी तक के संघर्ष में अपने किन-किन करीबी लोगों को और कब-कब गंवाया।

सुवेंदु अधिकारी स्वयं कभी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (दीदी) के करीबी थे। जब से उन्होंने ममता बनर्जी का साथ छोड़ा, तब से वह भाजपा के प्रमुख नेता और ममता बनर्जी के खिलाफ प्रमुख चेहरा बने हुए थे। सुवेंदु अधिकारी ने अपने इस संघर्ष के दौरान दो बार ममता बनर्जी को चुनावों में मौत दी। विधानसभा चुनाव 2021 में उन्होंने मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी को नंदीग्राम में हार का स्वाद चखाया तो विधानसभा चुनाव 2026 में 'दीदी' को उनके गढ़ भवानीपुर में हराकर चारों खाने चित्त कर दिया। इसी का परिणाम है कि आज उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया है और कल वह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। वह पश्चिम बंगाल में भाजपा के पहले मुख्यमंत्री बनेंगे।

ममता बनर्जी और सत्तारूढ़ TMC के खिलाफ संघर्ष के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने अपनी कई करीबी लोगों को खो दिया। इनमें से किसी की भी मौत प्राकृतिक नहीं थी, बल्कि हर किसी की राजनीतिक हत्या की गई। सुवेंदु अधिकारी के करीबी जिनकी उनके पूरे संघर्ष के दौरान हत्या हुई, उनकी फेहरिस्त बड़ी है।

साल 2013 में पीए की मौत

सुवेंदु अधिकारी के करीबी रहे प्रदीप झा, तृणमूल कांग्रेस के दिनों में उनके पर्सनल असिस्टेंट थे। साल 2013 में उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई, जिससे पूर्व मेदिनीपुर जिले में सनसनी फैला दी। लेकिन उस समय यह मामला बड़ा राजनीतिक मुद्दा नहीं बना। जांच के दौरान भी इस मामले में कोई क्रिमिनल एंगल नहीं मिला।

साल 2018 में सिक्योरिटी ऑफिसर मृत मिला

सुवेंदु अधिकारी के सुरक्षा अधिकारी सुभब्रत चक्रवर्ती साल 2018 में मृत पाए गए। सुभब्रत चक्रवर्ती राज्य पुलिस के कॉन्सटेबल थे, जिन्हें सुवेंदु अधिकारी का व्यक्ति सुरक्षा अधिकारी (PSO) बनाया गया था। सुभब्रत पूर्ब मेदिनीपुर में कांठी के पुलिस बैरक में मृत पाए गए थे। पुलिस ने शुरुआत में इसे आत्महत्या का मामला माना और कहा गया कि उन्होंने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से स्वयं को शूट कर लिया था। साल 2021 में सुभब्रत की पत्नी ने इस मामले की फिर से जांच की मांग की। इस मामले ने राजनीतिक रूप भी लिया, जिसमें भाजपा और TMC आमने-सामने आ गए।

साल 2021 में भी करीबी की मौत हुई

साल 2021 में सुवेंदु अधिकारी के एक और करीबी पुलक लाहिड़ी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस मामले में भी किसी तरह की आपराधिक साजिश का खुलासा नहीं हो पाया था।

चंद्रनाथ रथ को मारी गई गोली

4 मई 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए और भाजपा 207 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आई। इसके बाद 6 मई 2026 को सुवेंदु अधिकारी के करीबी चंद्रनाथ रथ की हत्या कर दी गई। चंद्रनाथ रथ की नॉर्थ 24 परगना में गोली मारकर हत्या की गई। चंद्रनाथ रथ की हत्या को भाजपा ने राजनीतिक हत्या करार दिया और मामले की गहनता से जांच की मांग की। जबकि TMC ने भाजपा के आरोपों को खारिज कर दिया। इस मामले में अभी जांच जारी है।

Digpal Singh
दिगपाल सिंहauthor

दिगपाल सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सिटी टीम को लीड कर रहे हैं। शहरों से जुड़ी ताजाखबरें, लोकल मुद्दे, चुनावी कवरेज और एक्सप्लेनर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। 2006 से पत्रकारिता में सक्रिय दिगपाल सिंह को प्रिंट और डिजिटल दोनों माध्यमों में काम करने का अनुभव है। दोनों प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए उन्होंने ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग से लेकर सेंट्रल डेस्क पर बड़ी खबरों की हैंडलिंग तक हर स्तर पर अनुभव हासिल किया है। अब तक 30,000 से अधिक खबरें लिख चुके दिगपाल हाइपर-लोकल न्यूज की बारीकियों, शहरों की समस्याओं और लोगों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को समझने की विशेष क्षमता रखते हैं।

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