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बाबा सिद्दीकी के बेटे जीशान और सलमान खान को जान से मारने की धमकी, फोन पर की गई पैसे की डिमांड

Death Threats to Zeeshan Siddique and Salman Khan: जीशान सिद्दीकी को फोन पर धमकी दी गई। बांद्रा ईस्ट स्थित उनके जनसंपर्क कार्यालय में धमकी भरा फोन आया और पैसे की डिमांड की गई। ऐसी ही एक धमकी बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को भी मिली है।

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जीशान सिद्धीकी और सलमान खान को जान से मारने की धमकी।

Death Threats to Zeeshan Siddique and Salman Khan: बाबा सिद्दीकी हत्या के बाद उनके बेटे जीशान सिद्दीकी को भी जान से मारने की धमकी दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जीशान सिद्दीकी को फोन पर धमकी दी गई। बांद्रा ईस्ट स्थित उनके जनसंपर्क कार्यालय में धमकी भरा फोन आया और पैसे की डिमांड की गई। ऐसी ही एक धमकी बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को भी मिली है। उनसे भी पैसे की डिमांड की गई है।

बता दें, हाल ही में एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की बांद्रा में हत्या कर दी गई थी। जीशान सिद्दीकी के ऑफिस के बाहर उन्हें कई बार गोली मारी गई थी। इस हत्या की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली थी, जिसके बाद बाबा सिद्दीकी की सुरक्षा चिंता का विषय बनी हुई है। पुलिस की जांच में गिरफ्तार किए गए शूटर्स के फोन से जीशान सिद्दीकी की तस्वीर भी मिली थी।

नोएडा से धमकी देने वाला गिरफ्तार

वहीं, इस मामले में मुंबई पुलिस ने नोएडा से एक 20 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। युवक की पहचान गुरफान खान के रूप में हुई है। पता चला है कि गुरफान खान ने ही जीशान सिद्दीकी को फोन पर धमकी देते हुए पैसे की डिमांड की थी। वहीं, नोएडा पुलिस ने भी इस मामले में जांच शुरू कर दी है।

जीशान सिद्दीकी की सुरक्षा में तैनात कांस्टेबल निलंबित

विधायक जीशान सिद्दीकी की सुरक्षा में तैनात एक कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है, क्योंकि क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) के औचक निरीक्षण के दौरान वह ड्यूटी स्थल से गायब पाया गया। अधिकारी ने बताया कि विधायक ने हाल में क्षेत्रीय पुलिस उपायुक्त दीक्षित गेदाम से मुलाकात की और अपनी सुरक्षा व्यवस्था पर नाराजगी जताई। उन्होंने बताया कि गेदाम इसके बाद जीशान सिद्दीकी के घर गए और उनकी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारी ने बताया कि इस दौरान कांस्टेबल विशाल अशोक थांगे अपनी ड्यूटी स्थल से गायब मिले। अधिकारी ने बताया, जब जीशान सिद्दीकी किसी आधिकारिक उद्देश्य से अपने घर से निकल रहे थे, तब थांगे अपने निर्धारित ड्यूटी स्थान पर नहीं थे। प्रारंभिक जांच के बाद थांगे को निलंबित कर दिया गया। उनके खिलाफ विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। बाबा सिद्दीकी की हत्या के बाद, उनकी सुरक्षा के लिए तैनात कांस्टेबल श्याम सोनवणे को निलंबित कर दिया गया था।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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